रूस के साथ परमाणु सहयोग पर सरकार का रुख, एसएमआर और बड़े परमाणु संयंत्रों पर चर्चा जारी

0
Putin-Modi

लोकसभा में डॉ. जितेंद्र सिंह का जवाब, सुरक्षा, पर्यावरण स्वीकृतियों और स्थानीय विकास को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने को लेकर बातचीत जारी है। परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम (Rosatom) के बीच विशाल क्षमता वाले परमाणु विद्युत संयंत्रों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर नियमित चर्चा हो रही है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी तक कोई भी विवरण अंतिम रूप से तय नहीं किया गया है।

लोकसभा में एक संसदीय प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु विद्युत संयंत्रों के सभी चरणों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने बताया कि किसी भी परमाणु परियोजना की स्थापना परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) द्वारा प्रदान की जाने वाली चरणबद्ध स्वीकृतियों के अनुरूप ही की जाती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि हितधारकों से परामर्श की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। भूमि अधिग्रहण के लिए आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) रिपोर्ट पर जन सुनवाई आयोजित की जाती है। वहीं, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट के तहत औपचारिक हितधारक परामर्श किया जाता है। इसके अलावा, आम जनता तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि सुरक्षा, पर्यावरण और अन्य अनुमतियों से संबंधित विभिन्न एजेंसियों द्वारा निर्धारित सभी शर्तों और सिफारिशों को पूरी निष्ठा से लागू किया जाता है।

स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा और समावेशी विकास के उद्देश्य से, परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एनपीसीआईएल (NPCIL) में परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के लिए आयु और अंकों में छूट जैसे विशेष प्रावधान किए जाते हैं। साथ ही, विभिन्न अनुबंधों के तहत स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाती है।

कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत, स्थानीय क्षेत्र के मेधावी छात्रों को कौशल विकास कार्यक्रम, छात्रवृत्तियां और उच्च शिक्षा के लिए प्रायोजन भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, जिन नए स्थलों पर परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं या पूर्व-परियोजना गतिविधियां चल रही हैं, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अवसंरचना विकास और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में कई सामाजिक कल्याण योजनाएं लागू की जा रही हैं।

सरकार का कहना है कि इन सभी पहलों का उद्देश्य परमाणु परियोजनाओं के आसपास रहने वाली आबादी के लिए समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करना है। यह जानकारी 4 फरवरी 2026 को लोकसभा में दी गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *