पूर्व सीएम हरीश रावत ने धामी सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

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उत्तराखंड में पेपर लीक का मामला गरमाया हुआ है। कांग्रेस लगातार इस मामले पर सरकार को घेर रही है। शुक्रवार को ही पूर्व सीएम हरीश रावत ने नकल को जिहाद बताने के सीएम धामी के बयान पर निशाना साधा था। आज उन्होंने पेपर लीक को एकल अपराध बताने के सरकार की कोशिश पर सवाल खड़ा किया है। रावत ने कहा कि एक बार वायरल होने के बाद इस बात को कैसे, किसी और ने इसका फायदा नहीं उठाया होगा?

हरीश रावत ने कहा कि ‘सरकार की पूरी शक्ति यह सिद्ध करने में लगी है कि यह “पेपर लीक” एकल अपराध है अर्थात एक व्यक्ति का अपराधिक कृत्य है और स्वयं सरकार की अभी तक की जांच बता रही है कि इस काम को अंजाम देने में कई लोग सम्मिलित थे, कुछ की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, कुछ लोगों को निलंबित किया जा चुका है और सरकार स्वयं इस बात को कह रही है कि परीक्षा प्रश्न पत्र के तीन पेज बाहर आए और वह सॉल्व होने के बाद वायरल हुए, लोगों के मोबाइलों की स्क्रीन पर यह सब तैरने लगा तो एक बार यदि इतने बड़े पैमाने पर कोई चीज वायरल हुई है तो इस बात की संभावना बनी रहेगी कि एक से अधिक व्यक्तियों ने उन तीन हल किए गए पन्नों का फायदा उठा लिया होगा।’

पूर्व सीएम ने कहा कि ‘एक बार वायरल होने के बाद इस बात को कैसे, किसी और ने इसका फायदा नहीं उठाया होगा? सरकार यह कैसे सुनिश्चित कर रही है कि एक से अधिक व्यक्तियों ने इस हल किए गए पन्नों का लाभ नहीं उठाया होगा? मुझे आगे की परीक्षाएं समय पर हों इसकी भी चिंता है, क्योंकि हजारों बेरोजगार नौजवान इस प्रत्याशा में बैठे हैं कि हम कम से कम एक-दो बार अपनी किस्मत आजमा लें, उनके अभिभावक भी चिंता में हैं. मुझे भाजपा की नियत पर गंभीर संदेह है कि ये नियुक्तियां करना भी चाहते हैं या नहीं चाहते हैं ? क्योंकि भाजपा का डीएनए सरकारी नौकरियों के खिलाफ है। आप इन भाजपा शासित राज्यों में देख लीजिए या केंद्र सरकार में देख लीजिए, विभागों में लाखों पद वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं।’

रावत ने सवाल उठाते हुए कहा कि ‘आखिर इन्हीं शिक्षित बेरोजगार नौजवानों का हक तो मारा जा रहा है और उत्तराखंड में भी जब से भाजपा आई है, पेपर लीक, नकल फिर परीक्षाएं स्थगित, जो परीक्षाएं हो गई हैं उनके रिजल्ट निकलने में देरी या रिजल्ट निकलने के बाद नियुक्ति पत्र देने में देरी और चयन के बाद भी लोगों की नियुक्ति नहीं हो रही है तो यह भाजपा की मंशा पर शंका पैदा करता है तथा राज्य भाजपा की मंशा पर भी शंका पैदा करता है और साथ-साथ यह कैसा कोइंसिडेंस है कि जितनी ऐसी घटनाएं हुई हैं, उन घटनाओं से जुड़े हुए लोग सब भाजपा से संबंधित निकल रहे हैं। यहां तक कि जिन लोगों के नाम आयुर्वेद विश्वविद्यालय और हल्द्वानी स्थित ओपन यूनिवर्सिटी में भी नियुक्ति में सामने आए हैं, वह सब नाम भाजपा से संबंधित लोगों के हैं। भाजपा के पास इस संदेह के निवारण के लिए कोई तर्क नहीं है।’

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