13 फरवरी: सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों का शुभारंभ
प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव, आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शासन की ओर कदम
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 13 फरवरी, 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे सेवा तीर्थ भवन परिसर के नामकरण का अनावरण करेंगे। इसके पश्चात सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ में आयोजित जनसभा को संबोधित भी करेंगे।
यह उद्घाटन देश की प्रशासनिक शासन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से विभिन्न मंत्रालयों और प्रमुख सरकारी कार्यालयों का अलग-अलग स्थानों पर संचालित होना न केवल समन्वय में बाधा उत्पन्न करता रहा, बल्कि परिचालन दक्षता, संसाधन प्रबंधन और लागत नियंत्रण जैसी चुनौतियों को भी बढ़ाता रहा। नए भवन परिसरों का उद्देश्य इन समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करना है।
नए परिसरों में प्रशासनिक कार्यों का समेकन सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहायक होगा। सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को एकीकृत किया गया है, जिससे उच्च स्तर के निर्णयों और नीतिगत समन्वय में गति आने की उम्मीद है।
वहीं, कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को आधुनिक अवसंरचना उपलब्ध कराई गई है। यह समेकन मंत्रालयों के बीच बेहतर सहयोग, तेज निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी प्रशासनिक संचालन को बढ़ावा देगा।
दोनों भवन परिसरों को अत्याधुनिक डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएँ नागरिकों और अधिकारियों दोनों के लिए अधिक सहज अनुभव सुनिश्चित करेंगी। इन परिसरों का डिजाइन 4-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुरूप किया गया है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और ऊर्जा-कुशल भवन संरचनाएँ शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, उन्नत निगरानी नेटवर्क और आपातकालीन प्रतिक्रिया अवसंरचना जैसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएँ परिसरों को सुरक्षित और सुलभ बनाती हैं। यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता और कर्मचारी कल्याण को भी प्राथमिकता देगी।
