“डबल वोटर” पर सख्ती: सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद उत्तराखंड में 1200 चुनावी याचिकाओं पर तेज कार्रवाई की मांग

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देहरादून | आज आयोजित पत्रकार वार्ता में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में “दोहरी मतदाता सूची” (डबल वोटर) के गंभीर मुद्दे को लेकर कई अहम तथ्य सामने रखे गए। पत्रकारों को संबोधित करते हुए Dr. Shakti Singh Bartwal ने कहा कि इस विषय पर शुरू की गई कानूनी लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और इसके ठोस परिणाम सामने आने लगे हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में नैनीताल जिले की धारी तहसील स्थित ग्राम पंचायत भदरेठ और चम्पावत की शक्तिपुरबुंगा जिला पंचायत सीट से जुड़े मामलों में आए न्यायालय के फैसलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून सर्वोपरि है।

नैनीताल में एसडीएम अंशुल भट्ट की अदालत ने ग्राम पंचायत भदरेठ की प्रधान आशा मटियाली का निर्वाचन रद्द कर दिया, क्योंकि उनका नाम दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में दर्ज पाया गया। अदालत ने दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी निर्मल सिंह को प्रधान घोषित करने का आदेश दिया।

इसी प्रकार चम्पावत में जिला जज अनुज कुमार संगल की अदालत ने जिला पंचायत सदस्य कृष्णानंद जोशी का चुनाव शून्य घोषित कर दिया। जांच में यह सामने आया कि उनका नाम पल्सों ग्राम पंचायत और चम्पावत नगर पालिका के नागनाथ वार्ड—दोनों मतदाता सूचियों में दर्ज था।

डॉ. बर्त्वाल ने कहा कि ये दोनों फैसले इस बात के संकेत हैं कि आने वाले समय में लगभग 1000 से अधिक ऐसे निर्वाचित प्रतिनिधि अयोग्य घोषित हो सकते हैं, जिन्होंने एक से अधिक स्थानों पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कर चुनाव लड़ा। उन्होंने इसे राज्य निर्वाचन आयोग की गंभीर लापरवाही बताया और कहा कि बार-बार अवगत कराने के बावजूद ऐसे अपात्र उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से नहीं रोका गया।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम, 2016 (संशोधित 2019) के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक से अधिक मतदाता सूची में नामांकित नहीं हो सकता। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा हाईकोर्ट और Supreme Court of India के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी की गई।

डॉ. बर्त्वाल ने जानकारी दी कि माननीय हाईकोर्ट के 11 जुलाई के ऐतिहासिक निर्णय पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर लग चुकी है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि कोई भी संस्था वैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध निर्णय नहीं ले सकती। उन्होंने इसे संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

वर्तमान में राज्य की विभिन्न जिला अदालतों में इस मामले से जुड़ी लगभग 1200 चुनावी याचिकाएं लंबित हैं। इस पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि इन मामलों का शीघ्र निस्तारण नहीं किया गया, तो लोकतंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस संबंध में पुनः हाईकोर्ट का रुख करेंगे, ताकि पूर्व आदेशों को प्रभावी रूप से लागू कराया जा सके।

उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनावी सुधार, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। उन्होंने इसे “सत्य की जीत, लोकतंत्र की जीत और कानून की जीत” बताया।

डॉ. बर्त्वाल ने अपने अधिवक्ता Abhijay Singh Negi एवं उनकी टीम का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस पूरे प्रकरण में सक्रिय भूमिका निभाई।

पत्रकार वार्ता के दौरान आम जनता से भी अपील की गई कि यदि किसी के पास ऐसे किसी प्रत्याशी की जानकारी है, जिसका नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज है, तो वे नोटराइज्ड शपथ पत्र के साथ अपनी शिकायत संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) या रिटर्निंग अधिकारी को दें।

यदि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है, तो राज्य निर्वाचन आयोग के ईमेल secelectionuk@gmail.com या टोल फ्री नंबर 1800-180-4280 पर संपर्क किया जा सकता है। साथ ही, डॉ. बर्त्वाल द्वारा जारी ईमेल sbartwal503@gmail.com पर भी शिकायतें और दस्तावेज भेजे जा सकते हैं, ताकि उन्हें न्यायालय में प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

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