मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी? 17 नए चेहरों की एंट्री, वैष्णव के प्रमोशन और गडकरी के मंत्रालय पर चर्चा
विकास शिशौदिया
नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026। बीजेपी संगठन में हालिया बदलाव के बाद अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में भी बड़े स्तर पर कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक मंत्रिमंडल में प्रदर्शन, चुनावी समीकरण, युवा नेतृत्व और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जा सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, संभावित फेरबदल में 16 से 17 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चा है। कई मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जाने और कुछ वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की अटकलें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
प्रदर्शन बनेगा मंत्रिमंडल विस्तार का बड़ा आधार
संभावित फेरबदल में मंत्रियों के कामकाज को अहम आधार माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के भीतर प्रत्येक मंत्री के प्रदर्शन की समीक्षा की जा रही है। सरकार के सामने 2027 के विधानसभा चुनावों के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव की भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर जमीनी संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में केंद्र सरकार ने मंत्रालयों और विभागों के प्रदर्शन का मूल्यांकन भी किया था। कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने मंत्रिपरिषद की बैठक में मंत्रालयों की प्रदर्शन रैंकिंग प्रस्तुत की थी। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासनिक प्रदर्शन को लेकर सरकार के भीतर समीक्षा की प्रक्रिया सक्रिय है।
अश्विनी वैष्णव के प्रमोशन की चर्चा
रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और आईटी जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे अश्विनी वैष्णव के संभावित प्रमोशन की चर्चा इस फेरबदल का प्रमुख हिस्सा है।
राजनीतिक चर्चाओं के हवाले से कहा गया है कि वैष्णव के कामकाज को देखते हुए उन्हें मोदी सरकार के शीर्ष पांच मंत्रियों में शामिल किए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। साथ ही, उनके पास मौजूद कई मंत्रालयों में से कुछ जिम्मेदारियां दूसरे मंत्रियों को देने की संभावना भी बताई गई है।
नितिन गडकरी के मंत्रालय में बदलाव की अटकलें
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर भी कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गडकरी को मंत्रिमंडल से हटाने के बजाय उनके मंत्रालय में बदलाव किए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
गडकरी के एक हालिया बयान के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई थीं। हालांकि, उनके कार्यालय ने बाद में स्पष्ट किया था कि उनके बयान का राजनीति से संबंध नहीं था। इसके बावजूद उनके विभाग में बदलाव की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।
14 मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय
रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार में फिलहाल 69 मंत्री हैं। इनमें 14 मंत्री ऐसे हैं, जिनके पास एक से अधिक मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। इस हिसाब से 12 पदों की गुंजाइश मौजूद है।
हालांकि, संभावित विस्तार में 15 से 17 नए मंत्रियों की चर्चा होने से केवल खाली पद भरने के बजाय मौजूदा मंत्रियों के विभागों और जिम्मेदारियों में भी व्यापक पुनर्व्यवस्था की संभावना जताई जा रही है।
युवा, महिला और चुनावी राज्यों पर नजर
संभावित कैबिनेट विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। विपक्ष की नजर इस बात पर है कि नए मंत्रिमंडल में महिलाओं, युवाओं, Gen-Z और चुनावी राज्यों को कितना प्रतिनिधित्व मिलता है।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा पंजाब और गोवा भी चुनावी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। ऐसे में इन राज्यों और संबंधित सामाजिक समूहों को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने के राजनीतिक संदेश पर भी नजर रहेगी।
सहयोगी दलों की भूमिका भी अहम
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में सहयोगी दलों की भूमिका पहले दो पूर्ण बहुमत वाले कार्यकालों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए संभावित कैबिनेट विस्तार में एनडीए सहयोगियों को भी प्रतिनिधित्व देने का दबाव एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कारक रहेगा।
सितंबर या अक्टूबर में विस्तार की चर्चा
रिपोर्ट में राजनीतिक चर्चाओं के हवाले से कहा गया है कि कैबिनेट विस्तार सितंबर या अक्टूबर में हो सकता है। हालांकि, तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संभावित विस्तार से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेतृत्व के स्तर पर मंत्रियों के प्रदर्शन, क्षेत्रीय संतुलन और आगामी चुनावों की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला लिए जाने की चर्चा है।
क्या बदलेगा मोदी सरकार का राजनीतिक संदेश?
संभावित कैबिनेट फेरबदल केवल मंत्रालयों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसके जरिए बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले युवा नेतृत्व, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सरकार के प्रदर्शन को लेकर नया राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
हालांकि, अश्विनी वैष्णव के प्रमोशन, नितिन गडकरी के विभाग में बदलाव और 16 से 17 नए चेहरों की एंट्री फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। अंतिम तस्वीर प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के आधिकारिक फैसले के बाद ही साफ होगी।
