सज्जन कुमार की तिहाड़ जेल में मौत, 1984 दंगों में मिली थी उम्रकैद

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तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जेल से तत्काल दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। सफदरजंग अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी स्थिति गंभीर हो चुकी थी। निधन की सूचना मिलते ही उनके बेटे जग प्रवेश कुमार तुरंत अस्पताल के लिए रवाना हो गए।

लंबे समय से बीमार

सज्जन कुमार पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से जूझ रहे थे। तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए बढ़ती उम्र और बीमारियों के चलते उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही थी, जिसके कारण उन्हें समय-समय पर चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ती रही थी। जेल प्रशासन के अनुसार, गुरुवार को उनकी हालत अचानक गंभीर हो गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने तक स्थिति काबू से बाहर जा चुकी थी और डॉक्टरों की टीम उन्हें बचा नहीं पाई।

दो मामलों में उम्रकैद

सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद तिहाड़ जेल में बंद थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को पालम कॉलोनी मामले में उन्हें दोषी करार दिया था, जिसमें पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को आग लगाए जाने की घटना शामिल थी। इसके बाद फरवरी 2025 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सरस्वती विहार मामले में भी उन्हें दोषी ठहराया, जिसमें जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या का आरोप था। दोनों ही मामलों में अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि सुल्तानपुरी और जनकपुरी-विकासपुरी जैसे कुछ अन्य मामलों में वे बरी भी हो चुके थे।

कौन थे सज्जन कुमार

23 सितंबर 1945 को दिल्ली में जन्मे सज्जन कुमार दिल्ली की राजनीति में एक समय बेहद प्रभावशाली चेहरा माने जाते थे। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1970 के दशक में दिल्ली नगर निगम के पार्षद के रूप में की थी। इसके बाद वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने और संजय गांधी के करीबी सहयोगियों में गिने जाने लगे। उन्होंने 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा चुनाव जीता और बाहरी दिल्ली क्षेत्र में कांग्रेस के मजबूत स्तंभ बने रहे। 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

जीवन का अंतिम दौर

पिछले कई वर्षों से सज्जन कुमार का जीवन तिहाड़ जेल की चारदीवारी में ही बीत रहा था। उम्रकैद की सजा के दौरान वे नियमित रूप से जेल के भीतर मेडिकल जांच और इलाज से गुजरते रहे थे। जेल में उनकी सेहत समय के साथ कमजोर होती चली गई। आज उनकी बिगड़ी तबीयत जानलेवा साबित हुई और अस्पताल पहुंचाए जाने के तुरंत बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

1984 दंगों के पीड़ित

सज्जन कुमार का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों के सबसे बड़े और लंबे समय तक चले मुकदमों में से एक से जुड़ा रहा। दंगों के करीब 34 साल बाद 2018 में जब उन्हें पहली बार दोषी करार दिया गया था, तो इसे पीड़ित परिवारों के लिए इंसाफ की एक बड़ी जीत के तौर पर देखा गया था। उनकी मौत की खबर के साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या उन्हें जेल में मिले इलाज पर्याप्त थे, हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

आगे की प्रक्रिया

सज्जन कुमार के निधन के बाद अब उनके पार्थिव शरीर को परिजनों को सौंपे जाने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। जेल में बंद किसी उच्च-प्रोफाइल कैदी की मौत के मामलों में आमतौर पर प्रशासनिक जांच भी की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जेल में चिकित्सा सुविधाओं और प्रोटोकॉल का सही ढंग से पालन हुआ था या नहीं।

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