FASTag से अब सिर्फ टोल नहीं, अपराधियों पर भी नजर! ANPR कैमरों से मिलेगी संदिग्ध वाहनों की जानकारी

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नई दिल्ली। देश के हाईवे पर टोल भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाला FASTag अब सुरक्षा व्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाने जा रहा है। केंद्र सरकार FASTag और टोल प्लाजा पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन यानी ANPR कैमरों के डेटा का इस्तेमाल वाहन चोरी, संगठित अपराध और आतंकी गतिविधियों की निगरानी के लिए करने की तैयारी में है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अधिकृत सुरक्षा और जांच एजेंसियों को FASTag तथा वाहनों से जुड़े डेटा तक नियंत्रित तरीके से पहुंच दी जाएगी।

संदिग्ध वाहन पर मिलेगा रियल टाइम अलर्ट

नई व्यवस्था की सबसे अहम खासियत रियल टाइम अलर्ट सिस्टम है। किसी संदिग्ध या ब्लैकलिस्टेड वाहन के टोल प्लाजा से गुजरते ही संबंधित अधिकृत एजेंसियों को इसकी सूचना मिल सकेगी। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

NIA, ED और पुलिस जैसी एजेंसियों की भूमिका

नई व्यवस्था में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA, प्रवर्तन निदेशालय यानी ED, पुलिस और परिवहन विभाग जैसी अधिकृत एजेंसियां जरूरत के अनुसार वाहन संबंधी जानकारी हासिल कर सकेंगी। किसी अपराध की जांच के दौरान FASTag और टोल रिकॉर्ड से वाहन की आवाजाही तथा संभावित रूट की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।

वाहन चोरी पर भी शिकंजा

सरकार की योजना का एक प्रमुख उद्देश्य वाहन चोरी के मामलों पर रोक लगाना है। चोरी किए गए वाहनों को अक्सर दूसरे राज्यों या सीमावर्ती क्षेत्रों में ले जाने की कोशिश होती है। ऐसे मामलों में FASTag और ANPR सिस्टम संदिग्ध वाहन की आवाजाही का पता लगाने में जांच एजेंसियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

ANPR कैमरे कैसे करेंगे काम?

टोल प्लाजा पर लगे ANPR कैमरे गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट को रिकॉर्ड करेंगे। सिस्टम वाहन के नंबर के साथ उसके रंग, कंपनी और मॉडल जैसी जानकारियों का मिलान करने में मदद करेगा।

अगर FASTag से जुड़ी जानकारी और कैमरे से मिले वाहन के विवरण में अंतर मिलता है, तो सिस्टम संदिग्ध वाहन की पहचान में सहायता करेगा। फर्जी नंबर प्लेट या क्लोन FASTag के इस्तेमाल वाले मामलों में भी यह तकनीक जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

हिट एंड रन की जांच में भी मदद

FASTag और ANPR डेटा का इस्तेमाल हिट एंड रन मामलों की जांच में भी किया जा सकता है। किसी दुर्घटना के आसपास मौजूद टोल प्लाजा से मिले टाइम-स्टैम्प और वाहन की आवाजाही के रिकॉर्ड के आधार पर जांच एजेंसियां संदिग्ध वाहन के संभावित रूट का पता लगा सकेंगी।

लूट, डकैती, अपहरण और हथियारों की तस्करी जैसे मामलों की जांच में भी वाहन की आवाजाही से जुड़ा डेटा उपयोगी हो सकता है।

डेटा की पहुंच पर रहेगा नियंत्रण

सरकार ने डेटा को आम लोगों के लिए सार्वजनिक करने की व्यवस्था नहीं की है। संबंधित जानकारी केवल अधिकृत एजेंसियों को तय प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों के अनुरोध और निर्धारित मानकों के आधार पर ही आवश्यक डेटा साझा किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य FASTag के मौजूदा नेटवर्क और ANPR तकनीक का इस्तेमाल करके हाईवे पर वाहनों की निगरानी को मजबूत करना और अपराध की जांच में एजेंसियों को तेज तथा सटीक जानकारी उपलब्ध कराना है।

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