E20 पेट्रोल से ही कम नहीं होता गाड़ी का माइलेज, सरकार ने बताए ये 6 बड़े कारण
नई दिल्ली। E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद गाड़ियों का माइलेज कम होने की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक वाहन का वास्तविक माइलेज केवल ईंधन की गुणवत्ता या उसमें मौजूद एथेनॉल की मात्रा से तय नहीं होता। ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, वाहन की स्थिति, टायर प्रेशर और AC के इस्तेमाल समेत कई दूसरे कारण भी ईंधन खपत को प्रभावित करते हैं।
सरकार ने E20 पेट्रोल की टेस्टिंग और जांच का हवाला देते हुए कहा है कि इसे इंजन की टिकाऊ क्षमता, ड्राइविंग परफॉर्मेंस, स्टार्टिंग, मटेरियल कंपैटिबिलिटी और जंग से बचाव जैसे प्रमुख मानकों पर परखा गया है। सरकार के अनुसार E20 के इस्तेमाल को लेकर हर माइलेज शिकायत को सीधे पेट्रोल से जोड़ना उचित नहीं है।
माइलेज कम होने के पीछे ये कारण
सरकार के अनुसार एक ही कार अलग-अलग परिस्थितियों में अलग माइलेज दे सकती है। ज्यादा ट्रैफिक में बार-बार ब्रेक लगाने और तेज एक्सेलरेशन से ईंधन की खपत बढ़ती है। इसी तरह गलत या कम टायर प्रेशर, लगातार AC का इस्तेमाल, वाहन का रखरखाव और ड्राइविंग का तरीका भी माइलेज पर असर डालते हैं।
E20 से कितना घट सकता है माइलेज?
सरकार पहले ही स्वीकार कर चुकी है कि E10 के लिए डिजाइन किए गए कुछ पुराने वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर फ्यूल इकॉनमी में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। हालांकि सड़क पर मिलने वाला वास्तविक माइलेज केवल ईंधन के आधार पर तय नहीं होता।
पेट्रोल में मिलावट की शिकायतों पर भी जांच
E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज के अलावा पेट्रोल में पानी और क्लोराइड की मात्रा को लेकर भी सवाल उठे थे। सरकारी तेल कंपनियों ने इस संबंध में पेट्रोल और एथेनॉल के कई सैंपल की जांच की। News24 की रिपोर्ट के मुताबिक 100 से ज्यादा रिफाइनरी पेट्रोल सैंपल और 80 से अधिक E20 सैंपल की जांच की गई। मंत्रालय के अनुसार जांच में क्लोराइड का स्तर निर्धारित सीमा के भीतर पाया गया।
पुराने वाहनों के लिए अलग चिंता
E20 को लेकर पुराने वाहनों के कुछ रबर पार्ट्स पर संभावित असर की चिंता भी सामने आई है। इसलिए पुराने वाहन मालिकों के लिए वाहन की उम्र, रखरखाव और निर्माता की ईंधन संबंधी सिफारिशों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
E20 को लेकर विवाद क्यों?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल और बाकी पेट्रोल होता है। भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है। सरकार ने E20 को लेकर कई बार कहा है कि इसके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि E20 को लेकर बहस अभी खत्म नहीं हुई है। माइलेज और पुराने वाहनों की अनुकूलता पर उपभोक्ताओं की चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए वाहन निर्माता की गाइडलाइन, सही टायर प्रेशर, नियमित सर्विस और अपनी ड्राइविंग परिस्थितियों पर ध्यान देना जरूरी है।
