PM मोदी ने जारी की रामनाथ कोविंद की आत्मकथा, बोले, “कोविंद जी का जीवन भारतीय समाज के लिए एक धरोहर”
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” का विमोचन किया। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कोविंद के संघर्षपूर्ण जीवन, उनके सार्वजनिक जीवन और भारतीय लोकतंत्र में योगदान की सराहना की।
कोविंद के जीवन को बताया प्रेरणादायक
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद का जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने कहा कि साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना उनके दृढ़ संकल्प और मेहनत को दर्शाता है।
बचपन के संघर्षों का भी किया जिक्र
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद के बचपन की एक दुखद घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कानपुर देहात स्थित उनके घर में बचपन के दौरान आग लग गई थी। इस हादसे में उनकी मां का निधन हो गया था। मोदी ने कहा कि इतनी कम उम्र में मां को खोने के बावजूद कोविंद ने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी और आगे बढ़ते हुए देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे।
युवाओं से आत्मकथा पढ़ने की अपील
प्रधानमंत्री ने देश की नई पीढ़ी से रामनाथ कोविंद की आत्मकथा पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि कोविंद का जीवन युवाओं को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और मेहनत के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मोदी ने युवाओं को आसान रास्ते तलाशने के बजाय निरंतर प्रयास और अनुशासन पर ध्यान देने का संदेश दिया।
राष्ट्र निर्माण और लोकतंत्र पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बाबा साहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति को अवसर और सम्मान देना होना चाहिए। उन्होंने रामनाथ कोविंद के सार्वजनिक जीवन को इसी व्यापक लोकतांत्रिक दृष्टि से जोड़कर देखा।
कोविंद ने भी साझा किए अपने अनुभव
रामनाथ कोविंद ने आत्मकथा के माध्यम से अपने जीवन के संघर्षों, सार्वजनिक जीवन के अनुभवों और राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों से जुड़े प्रसंगों को सामने रखा है। उन्होंने युवाओं से अपने अनुभवों से सीख लेने और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने की अपील की।
यह पुस्तक रामनाथ कोविंद के व्यक्तिगत संघर्ष और सार्वजनिक जीवन के अनुभवों के साथ भारतीय लोकतंत्र की यात्रा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाती है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इसके विमोचन के बाद पुस्तक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी चर्चा शुरू हो गई है।
