84 दिनों तक चला कारगिल युद्ध, ऐसे हर मोर्चे पर पाकिस्तान को मिली मात; जानिए जीत की पूरी टाइमलाइन

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नई दिल्ली। 26 जुलाई को मनाया जाने वाला कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बलिदान और रणनीतिक कौशल की गाथा है। वर्ष 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया कारगिल युद्ध करीब 84 दिनों तक चला, जिसमें भारतीय सेना ने दुर्गम पहाड़ियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर तिरंगा फिर से लहराया। इस युद्ध में ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन सफेद सागर ने निर्णायक भूमिका निभाई।

ऐसे शुरू हुआ कारगिल संघर्ष

कारगिल युद्ध की शुरुआत मई 1999 में हुई, जब स्थानीय चरवाहों ने कारगिल क्षेत्र में संदिग्ध घुसपैठ की जानकारी भारतीय सेना को दी। जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर कई रणनीतिक चोटियों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद भारत ने बड़े स्तर पर सैन्य अभियान शुरू किया।

ऑपरेशन विजय और वायुसेना की निर्णायक भूमिका

घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया, जबकि भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत हवाई हमले किए। दुर्गम पहाड़ों, बर्फीले मौसम और भारी गोलाबारी के बीच भारतीय सैनिकों ने असाधारण साहस का परिचय दिया और एक-एक कर महत्वपूर्ण चोटियों पर दोबारा कब्जा किया।

टोलोलिंग से टाइगर हिल तक मिली जीत

युद्ध के दौरान टोलोलिंग, प्वाइंट 5140, टाइगर हिल और बटालिक सेक्टर की कई रणनीतिक चोटियों पर भारतीय सेना ने निर्णायक जीत हासिल की। विशेष रूप से टाइगर हिल पर तिरंगा फहराना युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है, जिसने पाकिस्तान की रणनीति को पूरी तरह विफल कर दिया।

26 जुलाई को मिली ऐतिहासिक विजय

लगातार सैन्य कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने आधिकारिक रूप से ऑपरेशन विजय की सफलता की घोषणा की। इसी ऐतिहासिक जीत की स्मृति में हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

527 वीरों का सर्वोच्च बलिदान

कारगिल युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों के 527 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि सैकड़ों सैनिक घायल हुए। कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव और राइफलमैन संजय कुमार सहित अनेक वीरों की बहादुरी आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

आज भी प्रेरणा देता है कारगिल का इतिहास

कारगिल युद्ध ने भारत की सैन्य रणनीति, सीमा सुरक्षा और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में युद्ध की तैयारियों को नई दिशा दी। यह विजय केवल सीमा की रक्षा नहीं थी, बल्कि भारतीय सैनिकों के साहस, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का ऐसा अध्याय है, जिसे देश हमेशा गर्व के साथ याद रखेगा।

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