सरकार और CJP के बीच आज फिर होगी अहम बैठक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर केंद्र देगा जवाब
नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच आज दोपहर 3:30 बजे एक और महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार अपना पक्ष स्पष्ट कर सकती है। इससे पहले हुई वार्ताओं में अन्य मुद्दों पर सकारात्मक संकेत मिले थे, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर सहमति नहीं बन सकी थी।
इस्तीफे की मांग पर कायम CJP
CJP ने साफ कहा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे प्रमुख और गैर-समझौतावादी मांग है। संगठन का कहना है कि जब तक इस मांग पर निर्णय नहीं होता, आंदोलन वापस लेने का सवाल नहीं उठता। आंदोलनकारियों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो विरोध प्रदर्शन और तेज किए जाएंगे।
पिछली बैठक में दो मांगों पर मिला सकारात्मक संकेत
सरकार और CJP के बीच हुई पिछली बैठक में छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ मुद्दों पर सकारात्मक रुख सामने आया था। CJP के अनुसार, सरकार ने सिद्धांततः आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने जैसे मुद्दों पर सहमति जताई थी। हालांकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर निर्णय लेने के लिए सरकार ने अतिरिक्त समय मांगा था।
आज की बैठक पर टिकी निगाहें
आज होने वाली बैठक को पूरे आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जा रहा है। यदि सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलनकारी संगठन देशव्यापी प्रदर्शन की नई रणनीति की घोषणा कर सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश में जुटी हुई है।
संसद और सड़क, दोनों जगह जारी है टकराव
NEET पेपर लीक का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में लगातार गूंज रहा है। विपक्ष शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार परीक्षा सुधार, सख्त कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा कर चुकी है। इसके बावजूद आंदोलन और राजनीतिक गतिरोध अभी समाप्त होता नहीं दिख रहा है।
फैसले पर देशभर की नजर
सरकार और CJP के बीच होने वाली आज की वार्ता को छात्र, अभिभावक और राजनीतिक दल गंभीरता से देख रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक का परिणाम न केवल आंदोलन की दिशा तय करेगा, बल्कि संसद में जारी गतिरोध और परीक्षा सुधारों पर आगे की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
