क्या होता है मानसून का ‘रिवर्स गियर’? जानिए क्यों अचानक रुक जाती है बारिश और फिर लौट आता है बारिश का दौर

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नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में कभी मूसलाधार बारिश तो कभी अचानक सूखे जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक इसे मानसून के “रिवर्स गियर” या ब्रेक मॉनसून (Break Monsoon) की स्थिति बताते हैं। इस दौरान ऐसा लगता है कि मानसून पीछे लौट गया है और बारिश का सिलसिला थम गया है, लेकिन कुछ दिनों बाद यह फिर सक्रिय होकर कई राज्यों में तेज वर्षा कराता है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून एक समान गति से आगे नहीं बढ़ता। इसके दौरान कई बार सक्रिय (Active Phase) और कमजोर (Break Phase) चरण आते हैं। जब मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उनका प्रभाव सीमित हो जाता है, तब अधिकांश इलाकों में बारिश कम हो जाती है।

क्या है ‘रिवर्स गियर’?

मौसम विज्ञान की भाषा में “रिवर्स गियर” कोई आधिकारिक तकनीकी शब्द नहीं है। इसका इस्तेमाल आम बोलचाल में उस स्थिति के लिए किया जाता है, जब मानसून की सक्रियता अचानक घट जाती है और बारिश रुक जाती है। इस दौरान वर्षा का क्षेत्र बदल जाता है और कुछ इलाकों में बारिश कम हो जाती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी वर्षा जारी रह सकती है।

क्यों रुक जाती है बारिश?

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसूनी ट्रफ (Monsoon Trough) की स्थिति बदलने, कम दबाव के क्षेत्रों की कमी, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी में कमी तथा वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कई राज्यों में कुछ दिनों तक बारिश लगभग थम जाती है।

फिर कैसे लौटता है मानसून?

जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) बनता है और नमी वाली हवाएं दोबारा सक्रिय होती हैं, तब मानसून फिर गति पकड़ लेता है। इसके बाद कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।

किसानों और जल संसाधनों पर असर

मानसून के कमजोर पड़ने से खरीफ फसलों की बुवाई, सिंचाई और मिट्टी की नमी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, यदि इसके बाद अच्छी बारिश होती है तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो जाती है। हाल के दिनों में हुई व्यापक बारिश ने देश के कई हिस्सों में मानसून की कमी को काफी कम किया है।

मौसम विभाग की सलाह

मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के दौरान सक्रिय और कमजोर चरण आना सामान्य प्रक्रिया है। लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में बारिश कम होने के बावजूद अन्य राज्यों में भारी वर्षा, आंधी और बाढ़ जैसी स्थितियां बन सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का व्यवहार पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। ऐसे में कभी लंबे शुष्क दौर और कभी कम समय में अत्यधिक वर्षा जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं, जिससे कृषि, जल प्रबंधन और सामान्य जनजीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।

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