“धौलाना विधानसभा की राजनीति को सेवा और संवेदना से जोड़ना ही मेरा लक्ष्य”-दिग्विजय शिशौदिया

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  • दिग्विजय शिशौदिया से विशेष बातचीत

धौलाना (विशेष संवाददाता)। धौलाना विधानसभा में सियासी सरगर्मी तेज़ है। इसी बीच युवा, ज़मीनी और जन-सरोकारों से जुड़े समाजवादी पार्टी नेता दिग्विजय शिशोदिया चर्चा के केंद्र में हैं। लंबा समय समाज और क्षेत्र की समस्याओं के बीच बिताने वाले शिशोदिया ने दस्तावेज़ से बातचीत में अपने विज़न, प्राथमिकताओं और धौलाना के भविष्य पर खुलकर बात की।

प्रश्न: आप एक सफल व्यवसायी हैं, फिर राजनीति में आने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?

उत्तर: यह सवाल मुझसे अक्सर पूछा जाता है। सच यह है कि व्यवसाय ने मुझे आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन समाज ने मुझे पहचान दी। मैंने अपने क्षेत्र में लोगों की समस्याएँ बहुत नज़दीक से देखीं—चाहे वह बेरोज़गार युवा हों, परेशान किसान हों या मूलभूत सुविधाओं से वंचित परिवार।

व्यवसाय में रहते हुए भी मैंने हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों की मदद करने का प्रयास किया है। आज भी बड़ी संख्या में हमारे इलाके के युवा मेरे साथ कार्यरत हैं और अपने पैरों पर खड़े होकर आगे बढ़ रहे हैं। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मेरी व्यावसायिक यात्रा समाज के लिए अवसर और सहयोग का माध्यम भी बनी है।
राजनीति में आना मेरे लिए सत्ता की चाह नहीं, बल्कि व्यवस्था को सुधारने का एक सशक्त माध्यम है। जब किसी व्यक्ति के पास संसाधन, अनुभव और समाज के लिए कुछ ठोस करने की इच्छा हो, तो केवल व्यवसाय तक सीमित रहना मुझे उचित नहीं लगा। मैं चाहता हूँ कि मेरी सफलता सिर्फ व्यक्तिगत न रहे, बल्कि समाज की तरक्की और युवाओं के भविष्य में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

प्रश्न: धौलाना विधानसभा को आज आप किस मोड़ पर देखते हैं?

उत्तर: धौलाना विधानसभा आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। यहाँ की जनता अब परंपरागत राजनीति, खोखले वादों और केवल भाषणों तक सीमित सोच से आगे बढ़ चुकी है। लोग अब अपने जनप्रतिनिधियों से स्पष्ट जवाबदेही और ज़मीन पर दिखने वाले परिणाम चाहते हैं।
आज धौलाना की सबसे बड़ी माँग है कि विकास केवल फाइलों और घोषणाओं में नहीं, बल्कि सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, खेतों और घरों तक दिखाई दे। रोजगार के अवसर पैदा हों ताकि युवाओं को बाहर न जाना पड़े, शिक्षा की व्यवस्था मजबूत हो ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित बने और किसानों के मुद्दों का समाधान केवल मंचों से नहीं, बल्कि खेतों तक पहुँचे।
जनता अब यह तय कर रही है कि उसे ऐसी राजनीति चाहिए जो दिखावे की नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी की हो—जो सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए हो। यही समय की मांग है और यही धौलाना के भविष्य की दिशा भी तय करेगा।

प्रश्न: धौलाना विधानसभा में वर्तमान में बीजेपी से विधायक धर्मेश तोमर हैं। उनके कार्यकाल को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: मैं किसी भी व्यक्ति विशेष की आलोचना या प्रशंसा को राजनीति का आधार नहीं मानता। वे हमारे वरिष्ठ हैं, सम्माननीय हैं और पारिवारिक व सामाजिक रिश्तों से भी जुड़े हुए हैं। अपने छात्र जीवन से ही मैंने उन्हें राजनीति में सक्रिय देखा है और उनसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला है।

जनता ने उन्हें अपना जनप्रतिनिधि चुना है, इसलिए उनके पद और भूमिका का सम्मान किया जाना चाहिए।
जहाँ तक धौलाना विधानसभा  के विकास और अपेक्षाओं का प्रश्न है, जनता ने जिन आशाओं के साथ अपना प्रतिनिधि चुना था, उन पर कितना संतुलित और प्रभावी कार्य हुआ—इसका आकलन जनता स्वयं करती है। आज भी क्षेत्र में कुछ बुनियादी मुद्दे, युवाओं से जुड़े सवाल, किसानों की चुनौतियाँ और विकास की गति से संबंधित विषय चर्चा में हैं।
मेरा मानना है कि लोकतंत्र में राजनीति तुलना या टकराव की नहीं, बल्कि सकारात्मक परिणाम और जनसेवा की होनी चाहिए। अंततः जनता जिसे अधिक उपयुक्त और विश्वसनीय विकल्प मानेगी, वही धौलाना का भविष्य तय करेगा।

प्रश्न: आपकी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

उत्तर: मेरी सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है—वह विश्वास जो वर्षों तक लोगों के बीच रहकर, उनके सुख-दुख में सहभागी बनकर अर्जित हुआ है। मैंने राजनीति को कभी मंचों या दफ्तरों की दीवारों में कैद नहीं किया। किसान के खेत से लेकर मजदूर की मेहनत, युवाओं के सपनों से लेकर महिलाओं की चिंताओं तक—मैं हर जगह उनके साथ खड़ा रहा हूँ।
मेरे लिए राजनीति का अर्थ सत्ता नहीं, संवेदना है। जब किसी किसान की फसल खराब होती है, किसी युवा को रोजगार की चिंता सताती है या किसी परिवार को बुनियादी सुविधा के लिए भटकना पड़ता है, तो मैं उसे केवल समस्या नहीं, अपनी जिम्मेदारी मानता हूँ।
यही वजह है कि मेरी राजनीति का असली मंच गाँव की चौपाल है, जहाँ बिना किसी औपचारिकता के लोग दिल खोलकर अपनी बात कहते हैं। जनता से यह सीधा रिश्ता, यह अपनापन और भरोसा ही मेरी राजनीति की असली पूंजी है, और आगे भी यही मेरी सबसे बड़ी ताकत रहेगा।

प्रश्न: युवा वर्ग को लेकर आपकी ठोस योजना क्या है?

उत्तर: धौलाना विधानसभा का युवा आज आगे बढ़ना चाहता है, सपने देखता है और उन्हें पूरा करने की क्षमता भी रखता है, लेकिन संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण उसे मजबूरी में अपने क्षेत्र से बाहर जाना पड़ता है। मेरी सबसे बड़ी चिंता यही है कि हमारे नौजवान रोजगार, शिक्षा या बेहतर भविष्य की तलाश में पलायन कर रहे है —जबकि संभावनाएँ यहीं मौजूद हैं।
मेरी प्राथमिकता है कि धौलाना में ही ऐसे अवसर सृजित किए जाएँ, जहाँ युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। इसके लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाएँ और छोटे उद्योगों का विस्तार आवश्यक है।
इसके साथ ही खेल सुविधाओं का विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग, पुस्तकालय और मार्गदर्शन केंद्र उपलब्ध कराना भी मेरी योजना का अहम हिस्सा है। मेरा मानना है कि जब युवा अपने ही क्षेत्र में सम्मान के साथ आगे बढ़ेगा, तभी धौलाना सशक्त और आत्मनिर्भर बनेगा।

प्रश्न: किसानों की समस्याओं पर आप क्या कहना चाहेंगे?

उत्तर: किसान हमारे अन्नदाता हैं और उनकी मेहनत पर ही हमारा समाज और देश टिका है, लेकिन दुर्भाग्यवश आज वही किसान सबसे अधिक उपेक्षा और अन्याय का सामना कर रहा है। सिंचाई, बिजली, खाद-बीज की उपलब्धता और फसल के उचित मूल्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस काम की आवश्यकता तो है ही, साथ ही किसानों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।
धौलाना तहसील क्षेत्र में किसानों की ज़मीन औने-पौने दामों पर खरीदी जा रही है, लेकिन उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। जब किसान अपनी समस्या लेकर दफ्तरों और तहसील तक पहुँचता है, तो अक्सर उसकी सुनवाई नहीं होती। कई बार अधिकारियों का रवैया ऐसा होता है, जिससे किसान खुद को अपमानित और असहाय महसूस करता है।
इसके अलावा, किसानों से जुड़ी कई सरकारी योजनाएँ कागज़ों तक सीमित रह जाती हैं और ज़मीनी स्तर तक नहीं पहुँच पातीं। सबसे चिंता की बात यह है कि आज किसान को सही मार्गदर्शन देने वाला, उसे उसके अधिकारों और योजनाओं की जानकारी देने वाला कोई मजबूत मंच नहीं है।
मैं चाहता हूँ कि किसान केवल संघर्ष करता हुआ वर्ग न रहे, बल्कि सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बने। मेरी प्राथमिकता है कि किसान की आवाज़ प्रशासन तक मजबूती से पहुँचे, उसकी ज़मीन, मेहनत और भविष्य सुरक्षित रहे और उसे वह अधिकार और सहयोग मिले, जिसका वह वास्तविक हकदार है। तभी गाँव मज़बूत होंगे और धौलाना सच्चे अर्थों में विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।

प्रश्न: शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को कैसे सुधारेंगे?

उत्तर: सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाना और स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यक संसाधनों से लैस करना आज समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है। शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की बुनियाद होते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश धौलाना क्षेत्र में इन दोनों ही क्षेत्रों में अभी गंभीर कमियाँ मौजूद हैं। मेरा स्पष्ट मानना है कि किसी भी बच्चे को बेहतर पढ़ाई या किसी भी परिवार को इलाज के लिए अपने क्षेत्र से बाहर जाने को मजबूर नहीं होना चाहिए।
धौलाना क्षेत्र की एक बड़ी समस्या यह है कि यहाँ छात्रों के लिए कोई भी सरकारी डिग्री कॉलेज उपलब्ध नहीं है। जो कॉलेज इंटरमीडिएट स्तर तक संचालित हैं, उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं है—चाहे वह बुनियादी ढांचा हो, शिक्षकों की उपलब्धता हो या शैक्षणिक वातावरण। इसका सीधा असर यह होता है कि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज़ के क्षेत्रों में जाना पड़ता है, जिससे कई प्रतिभाशाली बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
मेरी प्राथमिकता है कि सरकारी स्कूलों में योग्य शिक्षकों, आधुनिक शिक्षण संसाधनों, पुस्तकालय और डिजिटल सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, साथ ही धौलाना क्षेत्र में एक गुणवत्तापूर्ण डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए ठोस प्रयास किए जाएँ।
इसी प्रकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि समय पर इलाज के अभाव में किसी की जान जोखिम में न पड़े।
मेरा लक्ष्य एक ऐसी धौलाना विधानसभा बनाना है, जहाँ हर बच्चे को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शिक्षा मिले और हर नागरिक को सुलभ, सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हों। यही सच्चा और टिकाऊ विकास है।

 प्रश्न: आपको बाकी नेताओं से अलग क्या बनाता है?

उत्तर: मैं दिखावे की राजनीति में विश्वास नहीं करता, बल्कि ज़मीन पर दिखाई देने वाले काम को ही अपनी पहचान मानता हूँ। मेरे लिए राजनीति सत्ता या लाभ का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा की जिम्मेदारी है। पैसा कमाने के लिए राजनीति करना मेरा उद्देश्य कभी नहीं रहा—ईश्वर की कृपा से मुझे एक अच्छा और स्थापित व्यवसाय मिला है, जिसने मुझे आत्मनिर्भर बनाया है।
मैं राजनीति में इसलिए हूँ क्योंकि जनता की सेवा करने का अवसर यहीं से मिलता है। सुख हो या दुख, संकट हो या संघर्ष—मैंने हमेशा लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को सुना है और उनके समाधान के लिए ईमानदारी से प्रयास किया है।
मेरे लिए कोई वर्ग, कोई जाति या कोई क्षेत्र अलग नहीं है। बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति के साथ खड़ा रहना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना—यही मेरी कार्यशैली और मेरी पहचान है। मैं चाहता हूँ कि लोग मुझे मेरे शब्दों से नहीं, बल्कि मेरे काम से जानें और पहचानें।

 प्रश्न: अगर जनता का समर्थन मिला तो धौलाना विधानसभा का भविष्य कैसा होगा?

उत्तर: धौलाना को एक आदर्श विधानसभा के रूप में विकसित करना मेरा सपना ही नहीं, बल्कि मेरी स्पष्ट प्रतिबद्धता है। मेरा उद्देश्य केवल कुछ योजनाएँ लागू करना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण बनाना है जहाँ विकास, रोजगार और सामाजिक सौहार्द एक-दूसरे के पूरक बनें।
मैं चाहता हूँ कि धौलाना में सड़कों, बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं का विकास समान रूप से हो, ताकि कोई भी गाँव या मोहल्ला खुद को उपेक्षित महसूस न करे। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हों, ताकि युवा अपने ही क्षेत्र में सम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें और पलायन की मजबूरी न रहे।
इसके साथ-साथ सामाजिक सौहार्द मेरी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। जाति, वर्ग या समुदाय के भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को साथ लेकर चलना ही सच्चे विकास की पहचान है। मेरा प्रयास रहेगा कि हर परिवार तक विकास की रोशनी पहुँचे, हर नागरिक को उसका हक़ मिले और धौलाना एक ऐसा क्षेत्र बने जिस पर यहाँ का हर व्यक्ति गर्व कर सके।
हर घर तक विकास पहुँचाना—यही मेरा संकल्प है और इसी दिशा में मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करता रहूँगा।

प्रश्न: अंत में जनता के लिए आपका संदेश?

उत्तर: आपका भरोसा मेरी सबसे बड़ी ताकत है और यही भरोसा मुझे हर दिन और बेहतर काम करने की प्रेरणा देता है। राजनीति में मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण जनता का विश्वास है, जिसे शब्दों से नहीं बल्कि ईमानदार प्रयास और ज़मीनी काम से मजबूत किया जा सकता है। मैं नहीं चाहता कि लोग मुझे मेरे वादों से पहचानें, बल्कि मेरे काम, मेरे व्यवहार और मेरी नीयत से जानें।
धौलाना के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना मेरे लिए केवल एक राजनीतिक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है। चाहे सड़क हो या स्कूल, किसान का हक़ हो या युवा का भविष्य—हर मुद्दे पर मैं पूरी मजबूती से खड़ा रहूँगा।
मैं जनता को यह भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि हर संघर्ष, हर समस्या और हर सवाल में मैं उनके साथ हूँ। धौलाना की आवाज़ को हर मंच तक पहुँचाना और यहाँ के लोगों को उनका हक़ दिलाना—यही मेरा संकल्प है और इसी राह पर मैं पूरी ईमानदारी से आगे बढ़ता रहूँगा।

 

संपादकीय टिप्पणी: दिग्विजय शिशोदिया की बातचीत से साफ़ है कि वे धौलाना की राजनीति को ज़मीनी मुद्दों, युवाओं और किसानों के इर्द-गिर्द केंद्रित करना चाहते हैं। आने वाले समय में जनता का रुख क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

 

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