राम मंदिर के CEO चयन की पहली शर्त आई सामने, सुरेश हावरे बोले, डिग्री नहीं रामभक्ति भी जरूरी
अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने योग्य उम्मीदवार की तलाश के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी गठित की है। समिति के सदस्य और शिरडी साईं संस्थान के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे ने नए CEO के चयन को लेकर जरूरी योग्यताओं का खुलासा किया है।
सुरेश हावरे के अनुसार, राम मंदिर के CEO पद के लिए केवल बड़ी डिग्री, प्रशासनिक अनुभव या पेशेवर योग्यता पर्याप्त नहीं होगी। उम्मीदवार का भगवान राम के प्रति श्रद्धावान होना और मंदिर की धार्मिक भावना को समझना भी जरूरी है।
रामभक्ति होगी CEO चयन की पहली शर्त
सुरेश हावरे ने कहा कि राम मंदिर किसी सामान्य कॉरपोरेट संस्था की तरह नहीं है। यहां CEO को प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने के साथ मंदिर की धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी समझना होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार पेशेवर रूप से योग्य होने के साथ रामभक्त भी होना चाहिए। मंदिर की गरिमा, परंपरा और धार्मिक मूल्यों के प्रति सम्मान चयन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार रहेगा।
तीन सदस्यीय समिति करेगी योग्य उम्मीदवार की तलाश
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO पद के लिए योग्य उम्मीदवारों की तलाश और नामों की सिफारिश करने के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई है।
समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिरडी साईं संस्थान के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे को शामिल किया गया है।
यह समिति उम्मीदवारों के प्रशासनिक अनुभव, पेशेवर क्षमता, वित्तीय प्रबंधन, नेतृत्व कौशल और धार्मिक संस्थाओं के संचालन से जुड़ी समझ का मूल्यांकन करेगी।
क्यों नियुक्त किया जा रहा है CEO?
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
इसके बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करते हुए एक पेशेवर CEO नियुक्त करने का फैसला किया। CEO मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था, कर्मचारियों के प्रबंधन और अन्य संचालन संबंधी जिम्मेदारियों की निगरानी करेगा।
प्रशासनिक अनुभव को मिलेगी प्राथमिकता
सर्च कमेटी ऐसे उम्मीदवार की तलाश करेगी, जिसके पास बड़े संस्थान या संगठन के संचालन का अनुभव हो।
उम्मीदवार के पास वित्तीय प्रबंधन, मानव संसाधन, प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही सुनिश्चित करने की क्षमता होनी चाहिए।
ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पेशेवर और पारदर्शी बनाना है।
धार्मिक भावना और पेशेवर क्षमता का होगा संतुलन
सुरेश हावरे के अनुसार, CEO के चयन में पेशेवर योग्यता और धार्मिक भावना के बीच संतुलन जरूरी रहेगा।
उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रशासन को कॉरपोरेट तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है, लेकिन मंदिर की धार्मिक पहचान और श्रद्धालुओं की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
CEO को मंदिर की व्यवस्था चलाने के साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा और सेवाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी।
तीन नाम ट्रस्ट को सौंप सकती है समिति
सर्च कमेटी योग्य उम्मीदवारों की समीक्षा करने के बाद संभावित नामों की सूची तैयार करेगी।
रिपोर्टों के अनुसार, समिति तीन योग्य उम्मीदवारों के नाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप सकती है। इसके बाद ट्रस्ट अंतिम चयन पर फैसला करेगा।
राम मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव
CEO की नियुक्ति को राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
अब तक ट्रस्ट के पदाधिकारी और अन्य अधिकारी मंदिर की प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। पेशेवर CEO की नियुक्ति के बाद रोजमर्रा के संचालन और प्रशासन की जिम्मेदारी नए ढांचे के तहत संचालित होगी।
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और मंदिर को बड़े पैमाने पर दान भी प्राप्त होता है। ऐसे में नए CEO के सामने वित्तीय पारदर्शिता, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रहेगी।
फिलहाल सर्च कमेटी योग्य उम्मीदवारों की तलाश में जुटी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि समिति किन नामों की सिफारिश करती है और राम मंदिर ट्रस्ट किसे पहला पेशेवर CEO नियुक्त करता है।
