कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, 70 डॉलर के करीब पहुंचा भाव, अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बाजार का बदला रुख
नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच कतर की मध्यस्थता में हुई वार्ता में सकारात्मक प्रगति की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं घटने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नरमी देखने को मिल रही है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कच्चे तेल के सस्ता होने से पेट्रोलियम आयात बिल कम होगा, महंगाई पर दबाव घटेगा और रुपये को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
अमेरिका-ईरान वार्ता का दिखा असर
कतर के दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। इसी के बाद निवेशकों की चिंता घटी और तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई।
ओपेक+ की रणनीति भी बनी वजह
विश्लेषकों का मानना है कि ओपेक+ द्वारा उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं और वैश्विक बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति की उम्मीद ने भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाया है। कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने भी अपने क्रूड ऑयल मूल्य अनुमान घटा दिए हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट से सरकार के आयात खर्च में कमी आने की उम्मीद है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। साथ ही परिवहन लागत और महंगाई दर को नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों में बदलाव तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति और अन्य कारकों पर निर्भर करेगा।
पहले ही जताया गया था अनुमान
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और तेल आपूर्ति सामान्य रहती है तो ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकता है। ताजा घटनाक्रम के बाद यह अनुमान काफी हद तक सही साबित होता दिखाई दे रहा है।
आगे किस पर रहेगी नजर
अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता के अगले दौर, ओपेक+ की आगामी बैठक और वैश्विक मांग-आपूर्ति के आंकड़ों पर रहेगी। यदि पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य बनी रहती है और उत्पादन बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।
