अखिलेश यादव ने डिजिटल सदस्यता अभियान की शुरुआत की, अंजलि मैसी बनीं समाजवादी पार्टी की पहली सदस्य
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने जन्मदिन के अवसर पर पार्टी के डिजिटल सदस्यता अभियान की शुरुआत की। अभियान का शुभारंभ दलित समाज से आने वाली अंजलि मैसी और उनके परिवार को पार्टी की सदस्यता दिलाकर किया गया। समाजवादी पार्टी के नए मोबाइल ऐप के माध्यम से अंजलि मैसी को पहला सदस्य बनाया गया। इस कदम को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
डिजिटल सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह अभियान समाज के हर पीड़ित, वंचित और उपेक्षित व्यक्ति को समाजवादी विचारधारा से जोड़ने का माध्यम बनेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रत्येक बूथ पर नए सदस्यों को जोड़ने का आह्वान भी किया।
अंजलि मैसी को क्यों चुना गया?
अंजलि मैसी वही युवती हैं, जिन्होंने 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती और बैसाखी के अवसर पर आयोजित भंडारे में अखिलेश यादव को प्रसाद ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया था। उस समय अखिलेश यादव ने भंडारे में पहुंचकर पूड़ी-सब्जी का प्रसाद ग्रहण किया था, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा में रहे थे।
इसके बाद अंजलि ने आरोप लगाया था कि उनके पिता, जो छावनी परिषद में सुपरवाइजर थे, उन्हें डिमोट कर सफाई कर्मचारी बना दिया गया। इस मुद्दे को लेकर अखिलेश यादव ने अंजलि और उनके परिवार को पार्टी कार्यालय बुलाकर समर्थन जताया था। अब उन्हें डिजिटल सदस्यता अभियान की पहली सदस्य बनाकर समाजवादी पार्टी ने एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
ऐप के जरिए घर बैठे मिलेगी सदस्यता
समाजवादी पार्टी ने अपने नए डिजिटल सदस्यता ऐप की भी शुरुआत की है। पार्टी का कहना है कि इस ऐप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति घर बैठे सदस्यता ग्रहण कर सकेगा और अन्य लोगों को भी सदस्य बनाने में सहयोग कर सकेगा। पार्टी ने विशेष रूप से युवाओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
2027 चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंजलि मैसी को पहली सदस्य बनाना केवल सदस्यता अभियान की शुरुआत नहीं, बल्कि दलित समुदाय तक मजबूत राजनीतिक संदेश पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले से मिले सकारात्मक परिणामों के बाद समाजवादी पार्टी अब 2027 के विधानसभा चुनाव में भी इसी सामाजिक समीकरण को और मजबूत करने की तैयारी में जुटी है।
