कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, 4 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा क्रूड, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से फिसलकर करीब 76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। यह पिछले चार महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। तेल की कीमतों में आई इस गिरावट के बाद आम लोगों के बीच पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने, वैश्विक आपूर्ति में सुधार और मांग को लेकर बनी अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और अन्य प्रमुख क्रूड बेंचमार्क में गिरावट दर्ज की गई है।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश के आयात बिल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे तेल विपणन कंपनियों की लागत में कमी आने की संभावना है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा और तत्काल असर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर दिखाई देगा, यह जरूरी नहीं है। ईंधन की कीमतें कई अन्य कारकों जैसे कर संरचना, परिवहन लागत, विनिमय दर और सरकारी नीतियों पर भी निर्भर करती हैं।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक निम्न स्तर पर बनी रहती हैं तो सरकार और तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को राहत देने पर विचार कर सकती हैं। इससे महंगाई दर पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने की संभावना बढ़ जाएगी।
वर्तमान में देशभर के उपभोक्ता पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित कटौती पर नजर बनाए हुए हैं। तेल बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच आने वाले दिनों में सरकार और तेल कंपनियों के फैसले महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं या और नीचे जाती हैं, तो आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं को ईंधन कीमतों में राहत मिल सकती है। फिलहाल बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और तेल की कीमतों की अगली दिशा पर टिकी हुई है।
