वही कातिल, वही मुद्दई और वही मुंसिफ? राम मंदिर चढ़ावा मामले में ट्रस्ट पर उठे गंभीर सवाल, जेवरात गायब होने की भी चर्चा

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम और जेवरात में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी और करोड़ों रुपये की बरामदगी के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि जिन अधिकारियों और पदाधिकारियों की निगरानी में पूरा सिस्टम संचालित होता था, क्या उनके रहते निष्पक्ष जांच संभव है।

ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी सवालों के घेरे में

मंदिर की व्यवस्थाओं, सुरक्षा और चढ़ावे की राशि की गिनती की जिम्मेदारी ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर होती है। इसके बावजूद लंबे समय तक कथित गबन का सिलसिला चलता रहा और किसी स्तर पर इसकी भनक तक नहीं लगी। यही वजह है कि ट्रस्ट की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

घटना सामने आने के बाद भी ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे मामले को लेकर अटकलों का दौर और तेज हो गया है।

क्या निष्पक्ष जांच कर पाएगी एसआईटी?

मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपी गई है। हालांकि, जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन प्रभावशाली लोगों तक पहुंचना है, जिनके नाम प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चर्चा में हैं। कई आरोपियों के ट्रस्ट से जुड़े लोगों या प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंध होने की भी चर्चा है।

अब तक पांच संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि बड़ी रकम अन्य जगहों पर भी खपाई गई हो सकती है।

सोशल मीडिया पर करोड़ों की चर्चा

शुरुआती चरण में कथित गबन की राशि आठ करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही थी। अब सोशल मीडिया पर यह आंकड़ा सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंचने के दावे किए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में 200 करोड़ रुपये तक की रकम का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, इन दावों की किसी भी आधिकारिक एजेंसी या जांच टीम ने पुष्टि नहीं की है। वास्तविक राशि का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही संभव माना जा रहा है।

क्या जेवरात भी हुए गायब?

सूत्रों के अनुसार, केवल नकदी ही नहीं बल्कि चढ़ावे में मिले सोने-चांदी के जेवरात में भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। चर्चाओं में करोड़ों रुपये मूल्य के आभूषणों के गायब होने की बात कही जा रही है।

कुछ सूत्र दो किलोग्राम वजन की सोने की गदा के गायब होने का भी दावा कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

व्यवस्था की खामियों की भी होगी जांच

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि जांच केवल दोषियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी व्यवस्था की खामियों की भी पड़ताल की जाएगी। उनका कहना है कि इस घटना ने मंदिर प्रशासन को कठिन स्थिति में ला खड़ा किया है, लेकिन भविष्य में श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

“दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा”

राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल विनय कटियार ने मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भी जांच होनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

इकबाल अंसारी ने मांगी निष्पक्ष जांच

बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया धन पवित्र विश्वास का प्रतीक है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी सवाल

जांच में सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, चढ़ावे की गिनती से जुड़े कई कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त किया गया था। आरोप है कि इनमें से कई कर्मचारी ट्रस्ट से जुड़े लोगों की सिफारिश पर रखे गए थे।

सूत्रों का दावा है कि कर्मचारियों के सत्यापन, निगरानी और नियमित जांच जैसी प्रक्रियाओं में गंभीर लापरवाही बरती गई। यही वजह रही कि लंबे समय तक कथित तौर पर रकम की हेराफेरी होती रही और किसी को इसकी जानकारी नहीं मिली।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

राम मंदिर परिसर में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के बावजूद आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई कर्मचारियों को परिसर में बिना किसी विशेष जांच के आने-जाने की छूट थी।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां और किस स्तर पर चूक हुई।

कम वेतन वाले कर्मचारियों के पास मिली करोड़ों की रकम

जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, वे कथित तौर पर 12 हजार से 18 हजार रुपये मासिक वेतन पर कार्यरत थे। ऐसे में उनके पास से करोड़ों रुपये की बरामदगी ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। अब उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक पत्र याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा भेजी गई याचिका में मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।

याचिका में अदालत की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और मंदिर के दान प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्थायी निगरानी तंत्र विकसित करने की मांग की गई है।

कुंभ और माघ मेले के दौरान बढ़ा था चढ़ावा

सूत्रों के अनुसार, महाकुंभ और माघ मेले के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी। इसी अवधि में मंदिर के चढ़ावे में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

जांच एजेंसियां अब यह भी खंगाल रही हैं कि क्या इसी दौरान कथित हेराफेरी का दायरा बढ़ा और बड़ी मात्रा में नकदी व अन्य मूल्यवान वस्तुओं की गड़बड़ी की गई।

फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई एसआईटी जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इस घटनाक्रम ने राम मंदिर में दान प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

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