यूपी चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा, सहयोगी दलों के साथ जल्द शुरू होगा सीट बंटवारे पर मंथन, रालोद ने भी बदली रणनीति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। समय से पहले चुनाव की संभावनाओं को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर जल्द चर्चा शुरू करने की तैयारी में है। पार्टी नेतृत्व केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और केंद्रीय संगठन की नई टीम के गठन के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
इसी क्रम में भाजपा की सहयोगी पार्टियों सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निषाद पार्टी ने भी सीटों के बंटवारे पर जल्द बातचीत शुरू करने की मांग उठाई है।
राजभर और संजय निषाद ने भाजपा नेतृत्व से की मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली पहुंचे सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की। इसके बाद राजभर और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व संगठन मंत्री सुनील बंसल से भी चर्चा की।
सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति पर जल्द मंथन शुरू करने का अनुरोध किया। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें आश्वस्त किया कि इसी महीने के अंत तक इस विषय पर औपचारिक बातचीत शुरू कर दी जाएगी।
भाजपा संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को जल्द गति देना चाहती है। इसी उद्देश्य से प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
बताया जा रहा है कि पंकज चौधरी और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने नई टीम को लेकर शीर्ष नेतृत्व से चर्चा की है। छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में से गोरखपुर और वाराणसी क्षेत्र को लेकर चल रहा विवाद भी सुलझा लिया गया है।
संभावना है कि इसी सप्ताह नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी जाएगी। नई टीम में सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के साथ विभिन्न मोर्चों में नए चेहरों को अवसर मिलेगा। पार्टी कार्यकारिणी में भी लगभग 50 प्रतिशत नए नेताओं को शामिल किए जाने की तैयारी है।
जुलाई तक तैयार होगा साझा चुनावी रोडमैप
भाजपा नेतृत्व की योजना सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव प्रचार और चुनावी रणनीति का साझा रोडमैप तैयार करने की है। सूत्रों के अनुसार जुलाई तक सीट बंटवारे और प्रचार अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
फिलहाल पार्टी 5 जून से 21 जून तक चल रहे सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में व्यस्त है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलाव भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में व्यापक चुनावी रणनीति पर अगले महीने अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
एनडीए में ताकत बढ़ाने के लिए रालोद ने बदला संगठन
उधर राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने भी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। पार्टी ने अपनी प्रदेश कार्यकारिणी भंग कर संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला लिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल संगठनात्मक पुनर्गठन नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर अपनी राजनीतिक ताकत और प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद एनडीए में शामिल हुई रालोद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित रहने के बजाय पूरे प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।
बुंदेलखंड, अवध और पूर्वांचल पर विशेष फोकस
रालोद नेतृत्व की रणनीति जाट राजनीति और किसान आंदोलन की पारंपरिक छवि से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में संगठन का विस्तार करने की है। पार्टी विशेष रूप से बुंदेलखंड, अवध और पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
सूत्रों के मुताबिक संगठन की समीक्षा के दौरान कई जिलों में अपेक्षित सक्रियता नहीं पाई गई। सदस्यता अभियान और संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसी कारण विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को पूरी तरह सक्रिय और प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर नए सिरे से गठन का निर्णय लिया गया है।
चुनावी समीकरणों पर सबकी नजर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने राजनीतिक तैयारी तेज कर दी है। वहीं रालोद जैसे दल भी अपने संगठन को मजबूत कर भविष्य की चुनावी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति और गठबंधन समीकरणों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
