पंजाब BJP का नया दांव: ‘बेचारे’ नेता करेंगे मेहनत, ‘इंपोर्टेड’ नेता लूटेंगे क्रेडिट भाजपा में बाहरी नेताओं को प्रभारी बनाकर दशकों से जुड़े नेताओं को सह संयोजक बनाया, पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी।
जालंधर: पंजाब भाजपा ने हाल ही में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए बाहरी दलों से आए नेताओं को अहम पद सौंप दिए हैं, जिससे पार्टी के दशकों पुराने वफादार नेताओं में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। यह नया प्रयोग पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बाहरी नेताओं का प्रभुत्व
भाजपा ने गिद्दड़बाहा, बरनाला, चब्बेवाल, और डेरा बाबा नानक जैसी सीटों पर विधानसभा उपचुनावों के लिए मंडल प्रभारियों और सह संयोजकों की नियुक्ति की है। हैरानी की बात यह है कि इन प्रभारियों में अधिकांश नेता कांग्रेस या अन्य दलों से हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं।
वफादार नेताओं की उपेक्षा
गिद्दड़बाहा में कांग्रेस से आए हरजोत सिंह कमल को प्रभारी बनाया गया, जबकि भाजपा की वरिष्ठ नेता मोना जायसवाल को सह संयोजक के पद पर रखा गया। इसी प्रकार, डोडा मंडल में हरमिंद्र सिंह जस्सी को प्रभारी और वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज चौधरी को सह संयोजक बनाया गया।
कार्यकर्ताओं में असंतोष
पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि दशकों तक भाजपा के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं को बाहर से आए नेताओं के अधीन काम करने पर मजबूर किया जा रहा है। इन नेताओं ने कभी इन्हीं बाहरी नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन किए थे, और अब उन्हीं के अधीनस्थ होकर काम करना विडंबना से कम नहीं।
BJP का नया प्रयोग विवादों में
भाजपा के इस नए प्रयोग को लेकर राजनीतिक और आम जनता दोनों में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। इसे पार्टी के लंबे समय से जुड़े नेताओं की अनदेखी और बाहरी नेताओं को प्राथमिकता देने के रूप में देखा जा रहा है।
