उत्तर प्रदेश :नाले के बगल में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं बच्चे

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फतेहपुर। सूबे के मुखिया शिक्षा के स्तर में सुधार का लगातार दावा करते रहते हैं, लेकिन मुखिया के इन दावों की फतेहपुर के एडेड स्कूल भीमराव अंबेडकर ने पोल खोलकर रख दी। समाज कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त  कक्षा एक से पांच तक के इस स्कूल में बदहाली का आलम ऐसा है कि बच्चे नाले के बगल में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
जगह-जगह गंदगी का अंबार, टीन की छत, नाले के बगल में बैठ कर पढ़ता देश का भविष्य। यह तस्वीरें यह दिखाने को काफी हैं कि आखिर प्राईमरी स्तर की शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल है। करीब सवा दो सौ बच्चों की संख्या वाले इस स्कूल में साफ-सफाई और अन्य काम के लिए बच्चों से 20 रुपये का शुल्क हर महीने वसूल भी किया जाता है। इसके बावजूद स्कूल में गंदगी का आलम ऐसा है कि शायद ही हम और आप अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजें।
यहां पढ़ने आने वाले गरीब परिवार के बच्चों को पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। दूर से स्कूल में काम करने वाली दाई बाल्टी में पानी भरकर लाती है, और बच्चों को पढ़ाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकार इस ओर ध्यान क्यों नहीं देती। जबकि समाज कल्याण अधिकारी से जब हमने इस बारे में बात की तो उनका साफ कहना था कि इस अनुदानित स्कूल के 7 लोगों के पूरे स्टाफ की तनख्वाह विभाग की तरफ से दी जाती है और साफ-सफाई से लेकर हर चीज की व्यवस्था विभाग पूरी करता है। उसके बाद भी अगर स्कूल आने वाले बच्चों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ होगा तो सोचना पड़ेगा।

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