पीएम मोदी ने पुतिन को भेंट की तिरुक्कुरल की रूसी प्रति, भारतीय संस्कृति और रूस के बीच दिखी खास कड़ी

0
HR7fGszaQAAWbB_

नई दिल्ली। भारत में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तमिल साहित्य की प्रसिद्ध प्राचीन कृति ‘तिरुक्कुरल’ के रूसी अनुवाद की प्रति भेंट की। इस उपहार के जरिए भारत की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को रूस तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

तिरुक्कुरल को भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है। इसके रचयिता संत-कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर माने जाते हैं। ग्रंथ में कुल 1,330 दोहे हैं, जिन्हें 133 अध्यायों में विभाजित किया गया है। इसमें नैतिक जीवन, शासन, सामाजिक व्यवहार, धन और मानवीय संबंधों जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं।

रूसी भाषा में तिरुक्कुरल की प्रति भेंट करने का फैसला सांस्कृतिक कूटनीति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मूल तमिल पाठ के साथ रूसी अनुवाद वाली यह पुस्तक भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को रूसी पाठकों तक पहुंचाने का माध्यम बनती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस संस्करण का प्रकाशन सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल से जुड़ा है।

तिरुक्कुरल का प्रभाव तमिल समाज में आज भी व्यापक है। तमिलनाडु में इसे शैक्षणिक स्तर पर पढ़ाया जाता है और तिरुवल्लुवर को संत, कवि और दार्शनिक के रूप में सम्मान प्राप्त है। इस ग्रंथ की शिक्षाओं को समय और भौगोलिक सीमाओं से परे मानवीय मूल्यों से जोड़ा जाता है।

मोदी-पुतिन मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं। दोनों नेताओं की हालिया बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के साथ BRICS के तहत सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।

पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। भारत 12 और 13 सितंबर को सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में BRICS देशों के प्रमुख नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

तिरुक्कुरल की रूसी प्रति के रूप में दिया गया यह उपहार भारत-रूस संबंधों के राजनीतिक और आर्थिक पक्ष के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सामने लाता है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से चुनी गई यह पुस्तक भारतीय ज्ञान परंपरा और तमिल साहित्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *