देहरादून को जाम और प्रदूषण से राहत, जल्द सड़कों पर दौड़ेंगी 100 नई इलेक्ट्रिक बसें
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में संचालित महानगर बस सेवा को मजबूत करने पर सरकार जोर दे रही है. इसके पीछे की मुख्य वजह यही है कि देहरादून शहर में ट्रैफिक एक गंभीर समस्या बन गई है. परिवहन विभाग हाईटेक बसों के संचालक पर जोर दे रहा है ताकि जनता, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक से अधिक इस्तेमाल करे.
देहरादून शहर में सार्वजनिक परिवहन बेहतर करने पर जोर: पर्यावरण और शहर में लगातार जाम की समस्या को देखते हुए परिवहन विभाग शहर में संचालित सिटी बसों को हाईटेक बसों में तब्दील करने के साथ ही 137 बसों को भी जल्द ही शामिल करने जा रहा है. हालांकि, एक बड़ी चुनौती यही है कि बड़ी संख्या पर चलने वाली सिटी बसों की वजह से क्या जाम की स्थिति से निजात मिलेगी या फिर जाम की समस्या और गंभीर हो जाएगी. आखिर क्या है परिवहन विभाग का रोड मैप, जनता को इसका कितना मिलेगा?
जाम और प्रदूषण से राजधानी वासियों को निजात दिलाने की कोशिश: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जाम की समस्या एक गंभीर चुनौती बनी हुई है. इसको देखते हुए जहां एक ओर पुलिस विभाग समय-समय पर नए प्रयास करता रहता है, ताकि जनता को जाम के झाम से निजात मिल सके. लेकिन दिन प्रति दिन जाम की समस्या एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. खासकर वीकेंड और त्योहारी सीजन के दौरान देहरादून की सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है. इसको देखते हुए परिवहन विभाग सिटी बस सेवा को बेहतर करने के साथ ही पॉल्यूशन मुक्त करने पर जोर दे रहा है. दरअसल, देहरादून में सालों से सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था, निजी सिटी बसों, मैजिक और विक्रम के भरोसे संचालित हो रही है. ऐसे में पीएम ई- बस सेवा योजना के तहत शहर में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था को बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है.
देहरादून में 100 पीएम ई-बस चलेंगी: लेकिन एक बड़ी चुनौती यही है कि पहले ही शहर में जाम की स्थिति एक बड़ी चुनौती है. ऐसे में अगर पीएम ई- बस सेवा योजना के तहत देहरादून शहर में 100 और इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, तो उससे सड़कों पर अत्यधिक दबाव बढ़ेगा. क्योंकि वर्तमान समय में स्मार्ट सिटी के तहत अलग अलग रूटों पर 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है. इसके अलावा, वर्तमान समय में शहर में 170 निजी सिटी बसों के साथ ही 400 विक्रम/मैजिक का संचालन हो रहा है. यही वजह है कि परिवहन विभाग निजी सिटी बसों के रिप्लेस पर जोर दे रहा है, ताकि वर्तमान में संचालित 170 निजी सिटी बसों को हाईटेक बसों में तब्दील कर दिया जाए, ताकि पॉल्यूशन कम हो और जनता को आरामदायक यात्रा का लाभ मिल सके.
परिवहन विभाग शहर में 300 के सार्वजनिक इस्तेमाल पर जोर दे रहा है: प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा में विस्तार होने से जाम की समस्या और बढ़ सकती है. ऐसा इसलिए भी है कि देहरादून शहर में पहले 300 निजी सिटी बसों का संचालन किया जा रहा था. लेकिन लगातार नुकसान होने के चलते करीब 130 निजी सिटी बस संचालकों के अपने वाहनों को सड़कों से हटा दिया. इसके अलावा, स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में 30 बसों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन ये बसें भी लगातार घटे में चल रही हैं. इसके पीछे की मुख्य वजह जनता का सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल न करना है. जबकि परिवहन विभाग शहर में करीब 300 बसों को सार्वजनिक परिवहन के तौर पर इस्तेमाल पर जोर दे रहा है. बहरहाल, परिवहन विभाग इस बात पर जोर दे रहा है कि नए तरीके से रूटों का निर्धारण किया जाए, ताकि जनता सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करे.
परिवहन आयुक्त का स्टेटमेंट: परिवहन विभाग के अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने कहा कि-
देहरादून शहर में पहले 300 गाड़ियां चलती थी. ऐसे में सड़कों में कुछ कमियां जरूर हैं, जिसको देखते हुए यह व्यवस्था की गई है कि शहर के जो मुख्य मार्ग हैं उन मार्गों पर बड़ी गाड़ियां यानी 25 से 30 सीटर और जो छोटे या संकरे मार्ग हैं, वहां पर छोटी गाड़ियों यानी 15 सीटर तक का संचालन किया जाएगा. ऐसे में आरटीओ के स्तर से रूटों का निर्धारण किया जाएगा.
-सनत कुमार सिंह, अपर परिवहन आयुक्त-
सनत कुमार ने बताया कि शहर में आबादी बढ़ रही है और उसका तेजी से विस्तार हो रहा है. ऐसे में अगर सार्वजनिक परिवहन को बेहतर नहीं करेंगे, तो लोग अत्यधिक निजी वाहनों का इस्तेमाल करेंगे, जिससे ट्रैफिक की समस्या और अधिक गंभीर होगी.
ट्रैफिक का दबाव कम करने की रणनीति: साथ ही बताया कि एक बस में अगर 30 लोग जा रहे हैं, तो उससे ट्रैफिक पर दबाव कम पड़ेगा. अगर वही लोग अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल करेंगे तो उससे सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या और अधिक बढ़ जाएगी, जिससे ट्रैफिक पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा. साथ ही पॉल्यूशन भी बढ़ेगा. ऐसे में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है. वर्तमान समय में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे बड़ा आधार सिटी बसें ही हैं. यही वजह है कि कमर्शियल वाहनों में शामिल सिटी बसों के शत प्रतिशत टैक्स को पहले ही माफ कर दिया गया था, ताकि सिटी बसों को बढ़ावा दिया जा सके. ऐसे में सिटी बसों बेहतर ढंग से संचालन पर शहर में जाम की स्थिति बनने की नहीं बल्कि उससे काफी हद तक निजात मिलेगी.
परिवहन मंत्री का बयान: परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि
प्रधानमंत्री ई- बस सेवा के तहत उत्तराखंड राज्य में 139 बसें प्राप्त हो रही हैं. इनके संचालन के लिए रूट प्लान तैयार किया जा रहा है. इन बसों का संचालन आउटर क्षेत्रों में किया जाएगा. इसमें देहरादून से ऋषिकेश, हरिद्वार एवं रुड़की रूट शामिल है. ताकि शहर के अंदर अत्यधिक वाहनों का दबाव न हो, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न न हो.
-प्रदीप बत्रा, परिवहन मंत्री, उत्तराखंड-
परिवहन मंत्री ने साथ ही बताया कि शहर के आउटर में न ही हाईटेक बस हैं और न ही स्टॉपेज हैं. वर्तमान समय में ई मोबिलिटी की तरफ सरकार बढ़ रही है, ताकि उत्तराखंड का पर्यावरण सुरक्षित रहे. शहर में संचालित सिटी बसों को इलेक्ट्रिक या हाईटेक बसों में तब्दील करने पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए 50 फीसदी सब्सिडी जा रही है.
