जेएनयूः दिल्ली सरकार ने देशद्रोह का केस चलाने की अनुमति देने के लिए मांगा एक माह का समय
जेएनयू देशद्रोह मामले की सुनवाई के दौरान आज दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत ने देशद्रोह का केस चलाने की अनुमति देने के लिए एक माह का समय मांगा है। इस पर पटियाला हाउस कोर्ट ने सरकार को तय समय सीमा के साथ उचित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जेएनयू देशद्रोह मामले की सुनवाई के दौरान आज दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत ने देशद्रोह का केस चलाने की अनुमति देने के लिए एक माह का समय मांगा है। इस पर पटियाला हाउस कोर्ट ने सरकार को तय समय सीमा के साथ उचित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि पिछली सुनवाई में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी न मिलने से नाराज अदालत ने कहा था कि वह स्वयं सीधे सरकार से जवाब मांगेगी। दरअसल, अदालत के समक्ष पेश दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के डीएसपी प्रमोद कुशवाहा पेश हुए थे। उन्होंने कहा आरोपियों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की इजाजत संबंधी फाइल दिल्ली सरकार के गृह विभाग के पास अभी भी लंबित है। सरकार को पत्र लिखकर जल्द इजाजत देने का आग्रह किया गया है।
पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर दंडाधिकारी दीपक सेहरावत ने बिना मंजूरी के आरोपपत्र दायर करने पर उस वक्त यह टिप्पणी की थी जब पुलिस ने बताया कि मंजूरी देना एक प्रशासनिक कार्रवाई थी और उसके बिना भी आरोपपत्र दायर किया जा सकता है। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के उपायुक्त प्रमोद कुशवाहा ने अदालत के समक्ष कहा था कि एजेंसी ने मंजूरी मांगते हुए पहले ही दिल्ली सरकार को एक अनुरोध पत्र भेजा है, जो कि अभी भी लंबित है।
इस पर अदालत ने दिल्ली सरकार से जवाब तलब करने की बात कही थी। अदालत ने कहा यदि अनुमति नहीं थी तो आरोपपत्र दायर करने की जल्दी क्या थी। फिलहाल अब मंजूरी संबंधी मुद्दा पुलिस का नहीं है। अदालत स्वयं सरकार से जवाब तलब कर पूछेगी कि आखिर मंजूरी कब तक मिलेगी।
उसी के बाद बुधवार(3 अप्रैल) को हुई सुनवाई में जब अदालत ने अनुमति के बारे में सरकार से सवाल किया तो सरकारी वकील ने कहा कि यह मामला दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन है और अनुमति मिलने में करीब एक माह या अधिक का समय लग सकता है। अतः अदालत सरकार को उचित समय दे। इस पर अदालत ने निर्देश दिया कि सरकार इस मामले में तय समय सीमा में उचित जवाब दाखिल करे।
क्या है मामला
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब तीन साल की जांच के बाद जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य समेत 10 आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह व अन्य धाराओं में मुकदमा चलाने की सरकारी अनुमति के बिना 14 जनवरी 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया था।
मामला संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर जेएनयू कैंपस में 9 फरवरी 2016 की रात आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है। इस मामले में कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य को गिरफ्तार गया था और वह फिलहाल जमानत पर हैं।
इनके अलावा आरोप पत्र में सात कश्मीरी छात्रों मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, आकिब हुसैन, रईस, बशारत, उमर गुल, खालिद बशीर को भी नामजद किया गया है। इन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था।
