15 अगस्त के बाद 17 अगस्त को मिली आज़ादी! जब गुरदासपुर और पठानकोट पाकिस्तान में चले गए थे विभाजन के समय पाकिस्तान का हिस्सा बने थे गुरदासपुर और पठानकोट, जस्टिस मेहर चंद के प्रयासों से दो दिन बाद फिर जुड़े भारत से
पठानकोट/गुरदासपुर : भारत जब 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ, तब भी गुरदासपुर और पठानकोट के लोगों को आज़ादी का इंतज़ार करना पड़ा। विभाजन के दौरान यह दोनों सीमावर्ती जिले पाकिस्तान का हिस्सा बना दिए गए थे। लेकिन, जस्टिस मेहर चंद के प्रयासों से मात्र दो दिन बाद, 17 अगस्त को यह फिर भारत का हिस्सा बन गए।
बमियाल कस्बे के निवासी रतन चंद ने बताया कि बंटवारे के दौरान लोग एक-दूसरे के दुश्मन बन गए थे। गुरदासपुर और पठानकोट शुरू में पाकिस्तान में चले गए, लेकिन पठानकोट के निवासी जस्टिस मेहर चंद के अथक प्रयासों के चलते दोनों जिले भारत में शामिल हो गए। इसकी आधिकारिक घोषणा रेडियो पर की गई थी।
जस्टिस मेहर चंद के पोते राजीव कृष्ण महाजन ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके दादा ने देश की एकता के लिए ऐसा ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने बताया कि गुरदासपुर और पठानकोट 15 अगस्त को भारत से अलग हो गए थे, लेकिन 17 अगस्त को आधिकारिक रूप से इन्हें भारत में शामिल किया गया।
