हरीश रावत की देहरादून में काफल पार्टी, ‘वोकल फॉर लोकल’ के साथ पलायन और पर्यावरण पर चिंता
देहरादून: उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और पलायन की समस्या को रेखांकित करने के उद्देश्य से पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने रविवार शाम देहरादून में ‘काफल पार्टी’ का आयोजन किया।
कार्यक्रम में रावत ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल नारा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और आर्थिकी को बचाने का माध्यम होना चाहिए।
“खुशी की बात है कि राजधानी देहरादून की सड़कों पर काफल ₹600 प्रति किलो बिक रहा है। 2014 में हमारी सरकार के समय जब हमने मंडुवे की बात की थी, तो मजाक उड़ाया गया था। आज वही मंडुवा ‘मिलेट’ बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर छा गया है,” रावत ने कहा।
विपक्ष पर तंज और चेतावनी
रावत ने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि आज मोटे अनाज के गुणगान हो रहे हैं, लेकिन मंडुवा और झंगोरा नेपाल से मंगाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि:
“नदी-घाटियों में अंधाधुंध होटल और भवनों का निर्माण चिंता का विषय है। यदि पांच से दस साल तक यही हाल रहा, तो उत्तराखंडी संस्कृति सिर्फ किताबों में ही नजर आएगी।”
पलायन और वीरता का सम्मान
पलायन पर बात करते हुए रावत ने कहा कि वह निर्जन गांवों और बाखलियों की स्थिति बताकर किसी का स्वाद नहीं बिगाड़ना चाहते, लेकिन सच्चाई यह है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो पर्वतीय गांवों में इंसानों के बजाय जंगली जानवर नाचते नजर आएंगे।
इस मौके पर उन्होंने भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के लिए सेना के शौर्य को सलाम किया और 22 पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया।
काफल: पहाड़ का स्वाद
कार्यक्रम में परोसा गया काफल उत्तराखंड के जंगलों में पाया जाने वाला एक बेहद रसीला और लोकप्रिय फल है, जो खासतौर पर अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र से मंगाया गया था।
राजनीतिक और सामाजिक जुटान
इस पार्टी में विधायक प्रीतम सिंह, पूर्व विधायक शूरवीर सिंह सजवाण, मनोज रावत, हीरा सिंह बिष्ट, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी समेत कई अन्य कांग्रेस नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
