2017 के चुनाव में सबसे ज्यादा जमानत जब्त होने पर RLD की हुई किरकिरी, अब ‘हॉट केक’ बनकर उभरी पार्टी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में कई दलों ने राजनीतिक समीकरण तय कर लिए हैं और कई दल तो चुनाव बाद अपने समीकरण सेट करने की फिराक में हैं, फिलहाल अभी राजनीतिक दल तो चुनाव प्रचार में जुटे हैं. भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी को साथ आने का खुला निमंत्रण भी दे दिया, लेकिन वह तो पहले से ही समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक गठजोड़ कर चुके हैं. गठजोड़ के बाद दोनों दल सत्तारुढ़ पार्टी पर निशाना साध रहे हैं.
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए विवादित तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों ने दिल्ली बॉर्डर्स पर लगातार आंदोलन किया और सालभर से ज्यादा समय तक चले आंदोलन ने किसानों और बीजेपी के बीच एक बड़ी खाई बना दी, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल गुरु पर्व के दिन अचानक कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर किसानों के साथ बने रहने का संदेश देने की कोशिश की. हालांकि लगता है कि इस मुद्दे पर किसानों की नाराजगी अभी भी बनी हुई है और भारतीय जनता पार्टी इसे खत्म करने की कोशिश में जुटी हुई है. खैर, उत्तर प्रदेश की राजनीतिक भविष्य में क्या छिपा है यह तो 10 मार्च को पता चलेगा जब मतगणना होगी.
2017 के चुनाव में 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों की जमानत जब्त
लेकिन अगर हम 5 साल पहले उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों पर नजर डालें तो पाएंगे कि 403 सीटों पर हुए चुनाव में 4139 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी, जबकि 5256 उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमाने उतरे थे. 1455 उम्मीदवार ऐसे थे जो निर्दलीय मैदान में उतरे और अपनी जमानत जब्त करा बैठे थे.
उत्तर प्रदेश में 2017 में हुए चुनाव में बड़े राजनीतिक दलों की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी ने 384 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे जिसमें 312 को जीत मिली और 5 उम्मीदवार ऐसे रहे जिनकी जमानत जब्त हो गई थी. इसी तरह बहुजन समाज पार्टी अकेली ऐसी पार्टी रही जिसने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा और जीत मिली महज 19 सीटों पर और 81 जगहों पर तो जमानत ही जब्त हो गई.
NCP-CPI और CPM की सभी सीटों पर जमानत जब्त
इन दोनों राष्ट्रीय दलों के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- एम (CPM) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने जितनी भी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हर जगह जमानत जब्त हो गई. CPI ने 68, CPM ने 26 और NCP ने 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और हर जगह बुरी तरह से हारे. एक अन्य राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस ने 114 सीटों पर लड़ने के बाद 29 जगहों पर जमानत गंवा दी.
लेकिन अब बात करते हैं उस पार्टी की जिसने सबसे ज्यादा जगहों पर अपनी जमानत गंवाई. यह दर राष्ट्रीय लोक दल. राष्ट्रीय लोक दल को उत्तर प्रदेश में राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा हासिल है और इस बार एक अन्य राज्य स्तरीय पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. इस गठबंधन को उम्मीद है कि उसे जीत मिल मिलेगी, लेकिन 2017 के चुनाव पर नजर डालें तो राष्ट्रीय लोक दल ने 277 सीटों पर चुनाव लड़ा था और महज 1 सीट पर जीत मिली थी, जबकि 266 सीटों पर जमानत जब्त हो गई थी. चुनाव आयोग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय लोक दल को कुल पड़े वोट में महज 2.59 फीसदी ही वोट मिले थे.
कांग्रेस 114 सीटों पर लड़ी और 29 पर जमानत जब्त
कांग्रेस की बात करें तो पार्टी ने 2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ करार के कारण महज 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 29 सीटों पर जमानत जब्त हो गई थी. जबकि 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने 355 सीटों पर दावेदारी ठोंकी थी, लेकिन 240 सीटों पर जमानत जब्त हो गई. इस तरह से उसकी 115 सीटों पर जमानत जब्त होने से बच गई थी और 2017 के चुनाव में पार्टी ने करीब इतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ा और इसमें एक चौथाई सीट पर जमानत जब्त करा बैठी.
कांग्रेस संग गठबंधन करने वाली समाजवादी पार्टी को 311 सीटों में से 28% वोट मिले और यह 2012 में उसके 29% वोट-शेयर से सिर्फ 1% कम था. लेकिन तब वह सत्ता में आ गई जबकि 2017 के चुनाव में उसके खाते में सिर्फ 47 सीटें आईं. हालांकि तब सत्तारुढ़ सपा ने भी 25 सीटों पर अपनी जमानत गंवा दी थी. सपा ने कांग्रेस से चार कम सीटों पर जमानत गंवाई जबकि वह अखिलेश की पार्टी ने उसकी तुलना में तीन गुना अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था.
6 राष्ट्रीय दलों के 338 उम्मीदवार जीते
2017 के चुनाव में उत्तर प्रदेश में 6 राष्ट्रीय दल तो 2 राज्य स्तरीय दल चुनाव मैदान में थे. इनके अलावा अन्य राज्यों में राज्य स्तरीय दल का दर्जा हासिल करने वाले 5 दल भी शामिल हुए थे. 6 राष्ट्रीय दलों के 1,025 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे जिसमें 338 को जीत मिली थी और 239 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. प्रदेश के राज्य स्तरीय दल में सपा और आरएलडी के 588 उम्मीदवार मैदान में थे और 291 की जमानत जब्त हो गई थी जबकि 48 को जीत मिली जिसमें आरएलडी के खाते में 1 सीट गई थी.
अन्य राज्यों की राज्य स्तरीय दल का दर्जा हासिल करने वाली 5 पार्टियों की ओर से 112 उम्मीदवार मैदान में थे जिसमें 110 की जमानत जब्त हो गई और एक भी सीट पर जीत नहीं मिली.
चुनाव आयोग से रजिस्टर्ड 289 दलों ने इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई और महज 14 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि 1,641 उम्मीदवारों की तो जमानत ही जब्त हो गई थी.
5 साल बाद अब फिर से उत्तर प्रदेश में चुनाव का माहौल है और इस बार राजनीतिक समीकरण बदले हुए हैं. 7 चरणों में चुनाव के बाद 10 मार्च को रिजल्ट आएगा. देखना होगा कि किन दलों की रणनीति कारगर साबित होती है और कितनों की जमानत जब्त होती है. 266 सीटों पर जमानत जब्त कराने वाली आरएलडी क्या इस बार पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन कर पाती है. या फिर किस पार्टी का सबसे खराब प्रदर्शन होता है. इसके लिए 10 मार्च तक इंतजार करना होगा.
