ख़बर का असरः ‘दस्तावेज’ की ख़बर का कुलपति ने लिया संज्ञान, परीक्षा से वंचित सभी छात्राएं देगी एग्ज़ाम
देहरादूनः हरिद्वार जनपद के दल्लावाला स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में परीक्षा देने से रोकी गई सभी बालिकाएं अब परीक्षा दे सकेंगी। विश्वविद्यालय ने इस संदर्भ में महाविद्यालय के प्राचार्य को पत्र भेज कर निर्देशित किया है कि सभी छात्राओं को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाय। दरअसल आपके लोकप्रिय न्यूज़ पोर्टल ‘दस्तावेज’ ने इस प्रकरण को छात्राओं के हित में उठाते हुए ‘कुलसचिव बताइये…श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय को छात्राओं की पढ़ाई से ऐतराज क्यों?’ शीर्षक से ख़बर को प्रकाशित किया। ख़बर प्रकाशित होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया।

वहीं श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. पी.पी. ध्यानी ने मामले का संज्ञान लिया और छात्राओं के हितों को देखते हुए उन्हें परीक्षा से वंचित न किये जाने का फैसला लिया। कुलपति डाॅ. ध्यानी ने इस आशय के साथ छात्राओं को परीक्षा देने की अनुमति प्रदान की कि वह भविष्य में विश्वविद्यालय के नियमों का पालन कर कक्षाओं में लगातार उपस्थित रहेंगी। कुलपति डाॅ. ध्यानी ने छात्राओं की समस्याओं को समझते हुए उन्हें परीक्षा से वंचित न करने का सराहनीय फैसला लिया। कुलपति के इस फैसले से छात्राओं ने अपनी खुशी व्यक्त की। साथ ही उनके अभिभावकों ने ‘दस्तावेज’ का शुक्रिया अदा करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. ध्यानी की भी सराहना की।

दरअसल हरिद्वार जनपद स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय दल्लावाला में बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की करीब 28 छात्राओं को परीक्षा से वंचित करने के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा विश्वविद्यालय से अनुमति मांगी गई। महाविद्यालय के प्राचार्य ने विश्वविद्यालय के मानकों के अनुसार 75 फीसदी से कम उपस्थिति वाली छात्राओं को परीक्षा में न बैठने देने के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र भेजा। जिस पर कुलसचिव ने कार्यवाही करते हुए छात्राओं को परीक्षा से वंचित करने की अनुशंसा की। लेकिन आपके लोकप्रिय न्यूज़ पोर्टल ‘दस्तावेज’ ने छात्राओं के हित में इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाया। जिसका संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. पी.पी. ध्यानी ने छात्राओं के भविष्य को देखते हुए इस आशय से छात्राओं को परीक्षा में बैठने की अनुममि दी कि वह भविष्य में शत प्रतिशत काक्षाओं में उपस्थित रहेंगे।
गौरतलब है कि कुल 43 छात्राओं की कक्षा में 28 छात्राओं को परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया। छात्राओं के अभिभावकों का कहना है कि स्थानीय परिस्थिति के चलते उनकी बालिकाएं कक्षा में अनुपस्थित रह जाती है। उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि उनकी बालिकाएं पढ़-लिखे लेकिन कुछ विषम परिस्थितियों के चलते वह कक्षाओं से वंचित रह जाती है।
