सुलगता सवालः किसके इशारों पर सीएम रावत की अंतर्कथा लिखने में जुटा है सोशल मीडिया
देहरादूनः मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाने की ख़बर इंटरनेट पर खूब चलती रहती है। लेकिन वक्त के साथ ये ख़बरे महज कोरी अफवाह रह जाती है। इस बार भी ख़बरनबीसों ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल के कंधे पर बंदूक रखकर फायर करने की एक कोशिस तो की, लेकिन यह फायर बैक फायर कर गया। अलबत्ता दिल्ली आलाकमान ने चुफाल को तो नसीहत दी ही साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह वाले पत्रकारों के खिलाफ भी बिसन सिंह चुफाल सीधे तौल पर निपटने के निर्देश दिये गये है।

एक बार फिर विधायकों की नौकरशाही से नाराजगी को मुख्यमंत्री से नाराजगी के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि नाराज विधायकों का नेतृत्व डीडीहाट के विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल कर रहे हैं। वहीं आज सोशल मीडिया में में चुफाल की राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात की भी फोटो वायरल हो रही है। वहीं दिल्ली भाजपा से जुडे सूत्रों का कहना है कि आलाकमान ने कोरोना संकट में क्षेत्र में काम न करने और प्रदेश नेतृत्व की शिकायत को लेकर चुफाल और उनके समर्थकों को लताड लगाई है। हालांकि बीच बचाव करते हुए बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने चुफाल की बात को आगे बढाते हुये कहा कि इनकी व्यक्तिगत नाराजगी है और यह वरिष्ठ विधायक के नाते नेतृत्व से मिलने आये है। उधर चुफाल की ओर से विधायको अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का भी कारण पूछा गया तो चुफाल आकाकमान के आगे नतमस्तक हो गये। जिस कारण चुफाल को आलाकमान से फटकार भी पड़ी है। आलाकमान ने साफ कर दिया गया है कि वह छेत्र में जाकर काम करें। सरकार के खिलाफ असन्तोष न फैलाएं।
70 पार चुफाल पर नरमी के मूड में नही भाजपा आलाकमान
दिल्ली बीजेपी पर मजबूत पकड रखने वाले उत्तराखंड मूल के जेपी पुरोहित ने बताया कि कि चुफाल 70 पार हो गए हैं। विधानसभा में सक्रियता भी कम है। इसलिए उन्हें लग रहा है कि अगली बार कहीं टिकट न कट जाए। इसलिए मन्त्री बनने की चाहत में वह ऐसा कर रहे हैं। पुरोहित ने साफ करते हुये कहा कि उनकी बीजेपी के उच्च पदाधिकारियों से भी इस संबंध में बात हुये तो उनका सीधा जवाब है कि चुफाल 70 पार हो चुके है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की वह प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ झंडा बुलंद करे। उन्होंने कहा कि देरसबेर चुफाल को इस छोटी शियासत का बडा नुकशान उठाना पडेगा। साथ ही बीजेपी आलाकमान को यह भी जानकारी मिली है कि चुफाल अपने चेलों को खड़िया और खनन का काम नहीं दिला पा रहे है। जिसका दबाव उनके उपर है और उन्होेंने अपना अंतिम दाव चलते हुये यक कदम उठाया है।
चुफाल और समर्थकों को क्षेत्र में काम करने ककी नसीहत
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की सख्त और ईमानदार छवि को धूमिल करने के एक बार प्रयास फिर शुरू हो गये हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जब से राज्य में जीरो टाॅलरेंस का नारा बुलंद किया भ्रष्ट तंत्र पर नकेल कसनी शुरू की तब से सरकार को लेकर ऐसी अफवाहें उडनी शुरू हो गई। यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की बातें सामने आई हों। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद से ही लगातार अफवाहें उडती रही हैं। पिछले साढ़े तीन साल में राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहें कहीं बार उड़ी। खुद मुंख्यमंत्री और आलाकमान ने सामने आकर ऐसी अफवाहों का खंडन किया। सीएम के खिलाफत करने वाले कई बार इस तरह की भविष्यवाणी कर चुके हैं। लेकिन इस बार भी दाव उल्टा पड गया है। अब आलाकमान ने चुफाल और उनके करिबियों को क्षेत्र में काम करने की नसीहत तक दे डाली है।
