नए उपराष्ट्रपति की तलाश तेज: भाजपा कोर कैडर और संघ पृष्ठभूमि के नेता को दे सकती है तरजीह

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नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद देश के नए उपराष्ट्रपति को लेकर मंथन शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बार इस उच्च संवैधानिक पद के लिए पार्टी की मूल विचारधारा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े वरिष्ठ नेता के नाम पर विचार कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व में यह स्पष्ट सोच बन रही है कि शीर्ष संवैधानिक पदों पर नियुक्ति उन्हीं नेताओं को दी जाए, जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि भाजपा या संघ की विचारधारा से गहराई से जुड़ी हो। इसका कारण यह भी है कि दूसरे दलों से आए कई नेताओं ने हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के लिए असहज परिस्थितियां पैदा की हैं।

पीएम की सहमति के बाद होगा नाम तय

सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा से वापसी के बाद इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पार्टी इस महत्वपूर्ण पद पर ऐसा चेहरा चाहती है, जो संगठनात्मक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ राज्यसभा में सुचारू संचालन की जिम्मेदारी निभा सके।

कोर कैडर को मिल रही प्राथमिकता

हाल के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने कई ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया है जो छात्र जीवन से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे हैं। इनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव और राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा प्रमुख हैं। यह रुझान इस ओर संकेत करता है कि पार्टी नेतृत्व अब हर अहम जिम्मेदारी मूल कैडर के नेताओं को ही सौंपना चाहता है।

दक्षिण और पूर्वी राज्यों से भी हो सकता है चयन

नए उपराष्ट्रपति के चयन में क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखा जा रहा है। दक्षिण भारत से उपराष्ट्रपति की मांग लगातार उठ रही है। वहीं, आगामी बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को देखते हुए इन राज्यों से भी उपराष्ट्रपति पद के लिए नाम पर विचार किया जा सकता है।

एनडीए सहयोगी दल भी कर सकते हैं दावेदारी

सूत्रों के अनुसार, एनडीए के प्रमुख घटक दल जैसे तेलुगु देशम पार्टी (TDP) इस पद पर दावेदारी पेश कर सकते हैं। हालांकि राज्यसभा के उपसभापति पद पर पहले ही जनता दल यूनाइटेड (JDU) के हरिवंश तैनात हैं, ऐसे में सत्ता संतुलन को बनाए रखने के लिए सहयोगी दलों की संतुष्टि भी महत्वपूर्ण होगी।

पिछले अनुभवों से पार्टी सतर्क

गौरतलब है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस और जनता दल से जुड़े रहे थे। हाल ही में संसद सत्र के दौरान उनके कुछ बयानों से पार्टी असहज स्थिति में आ गई थी। इससे पहले, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक और डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी जैसे नेता भी अपनी टिप्पणियों से सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर चुके हैं।

इन अनुभवों से सबक लेते हुए भाजपा अब किसी भी शीर्ष पद के लिए ऐसे नेताओं को तरजीह देना चाहती है जो पार्टी की विचारधारा के साथ न सिर्फ वैचारिक रूप से जुड़ाव रखते हों, बल्कि पार्टी की कार्यशैली से भी भली-भांति परिचित हों।

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