सात साल बाद भी नहीं बन पाया सनगांव-नाईकलां मोटर मार्ग, ग्रामीणों में दिखा डबल इंजन सरकार के प्रति आक्रोश
देहरादून। भारी बरसात के चलते सनगांव सिंगवाल नाईकलां गांव का सम्पर्क मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। जिससे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को आवागमन में भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। सिंगवाल गांव में तकरीबन 40 परिवार रहते हैं। यहां पर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगवाल गांव भी है। जहां आस-पास के बच्चे पढ़ने आते हैं। सम्पर्क मार्ग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होने चलते उन्हें भी खासी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। आजकल विद्यालय प्रबंधन समिति, प्रधानाचार्य एवं छात्रों द्वारा श्रमदान कर विद्यालय पहुंचने के लिए मार्ग बनाया जा रहा है।

सिंगवाल गांव डोईवाला विधानसभा के तहत प्रस्तावित सनगांव-नाईकलां मोटर मार्ग पर पड़ता है। जो राजधानी देहरादून और जौलीग्रांट एयरपोर्ट से चंद फासले पर है। बरसात के चलते ये यहां जो कच्चा मार्ग है ध्वस्त हो गया है। जिससे सिंगवाल गांव, सनगांव और नाईकलां का संपर्क कट गया है। स्कूल को जोड़ने वाली इस सड़क के हालात से कदर खराब है कि रोजाना स्थानीय लोगों, विद्यालय कार्मिकों व अध्यापकों द्वारा सड़क बनाकर विद्यालय तक पहुंचा जाता है।
क्षेत्रीय विधायक बृजभूषण दावा करते हैं कि उनके विधानसभा क्षेत्र में सभी मार्ग बना दिए गए हैं। लेकिन इन दावों के उलट इस गांव की सड़क ना तो पक्की बनी है और ना इसका अभी तक चौड़ीकरण हो पाया है। सड़क के हालात इस कदर खराब है इस पर पैदल चलना भी मुश्किल है। बरसात के चलते आए दिन स्कूली बच्चों को 7 से 8 किलोमीटर दूर पैदल जाकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। डबल इंजन सरकार का दावा है कि रोजाना सड़क बन रही है, बड़ा सवाल ये है कि वो सड़कें बन कहां रही हैं?
ग्रामीणों के मुताबिक इस मार्ग को बनाने का साल 2017 में प्रस्ताव पास हुआ था। लेकिन रोड बनाने का काम एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाया है। अलबत्ता इतने सालों में यहां रोड के सर्वे का खेल ही चल रहा है। सड़क निर्माण में देरी के लिए अधिकारी कभी वन विभाग तो कभी पर्यावरण मत्रालय को इसका जिम्मेदार ठहराते हैं। ग्रामीण बताते है की गांव के लिये जो भी कच्चा सम्पर्क मार्ग है वो भी ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाया है। क्षेत्र की इस उपेक्षा के चलते स्थानीय ग्रामीणों में अपने जनप्रतिनिधियों को लेकर भी खासा आक्रोश है। ग्रामीण कहते हैं कि चुनावों के समय नेता आते हैं बड़े-बड़े वायदे कर चले जाते हैं।
