अब अखिलेश यादव ने रखी जातिगत जनगणना की मांग, बताया क्यों है जरूरी?
उत्तर प्रदेश में उपचुनाव के परिणामों के बाद से समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव सरकार पर लगातार हमलावर नजर आ रहे हैं. सपा प्रमुख समेत विपक्षी नेताओं ने बीजेपी सरकार के खिलाफ कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा है. लेकिन अब अखिलेश यादव ने राज्य में जातिगत जनगणना की मांग भी रख दी है. इस दौरान उन्होंने जातिगत जनगणना की जरूर भी बताई.
बिहार में जातिगत जनगणना की मांग बीते लंबे समय से चल रही थी. लेकिन बीते दिनों आरजेडी और जदयू गठबंधन की सरकार ने राज्य में जातिगत जनगणना कराने का फैसला लिया है. जिसके बाद अब अन्य राज्यों ने भी जातिगत जनगणना को लेकर मांग तेज हो रही है. बिहार के बाद अब पड़ोसी राज्य यूपी में भी जातिगत जनगणना की मांग रखी गई है.
क्या किया ट्वीट?
यूपी में जातिगत जनगणना की मांग अखिलेश यादव ने रखी है. उन्होंने बुधवार को एक ट्वीट कर लिखा, “सामाजिक न्याय के लिए जातिवार जनगणना होनी ही चाहिए. ये सिर्फ हमारी ही नहीं सच्चे सामाजिक लोकतंत्र की भी मांग है.” हालांकि राज्य में इससे पहले सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर भी जातिगत जनगणना की मांग करते रहे हैं. लेकिन अखिलेश यादव ने ट्वीट के जरिए सीधे तौर पर अब ये मांग रखी है.

हालांकि इससे पहले एबीपी न्यूज से शो प्रेस कांफ्रेंस में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से जातिगत जनगणना पर सवाल किया गया था. तब डिप्टी सीएम ने कहा था, “मेरा सवाल उन लोगों से है. लेकिन हम इसके समर्थन में हैं, उसके विरोध में नहीं हैं. मैं जातिगत जनगणना के विरोध में नहीं हूं, बल्कि समर्थन में ही हूं. ये होनी चाहिए, इसमें कोई गलत नहीं है.”
बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर कई राज्यों में ओबीसी वोटर्स पर पार्टियों का खास फोकस है. ओबीसी वोटर्स को ध्यान में रखते हुए पार्टियों द्वारा राज्य में जातिगत जनगणना की मांग रखी जा रही है.
