SAI ने खेल अवसंरचना को दी नई मजबूती
शासी निकाय की बैठक में देशभर की प्रमुख खेल परियोजनाओं को मंजूरी, खेल मंत्री ने एथलीट-केंद्रित दृष्टिकोण पर दिया जोर
केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के शासी निकाय (GB) की बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें देशभर में खेल अवसंरचना के विकास और उन्नयन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि भारतीय खेल परिवेश अब एक परिपक्व और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि इसे हर संभव तरीके से मजबूत करना समय की आवश्यकता है ताकि देश का खेल भविष्य उज्ज्वल बन सके। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय एथलीट-केंद्रित हैं और इनका उद्देश्य खिलाड़ियों को उनकी जरूरतों के अनुरूप सर्वोत्तम सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे भारत राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक में अपने पदक लक्ष्यों को हासिल कर सके।
शासी निकाय द्वारा स्वीकृत प्रमुख परियोजनाओं में बेंगलुरु स्थित SAI नेताजी सुभाष दक्षिण केंद्र (NSSC) के लिए पॉलीग्रास पेरिस जीटी जीरो हॉकी टर्फ की खरीद शामिल है। यह केंद्र भारतीय पुरुष और महिला राष्ट्रीय तथा ‘ए’ हॉकी टीमों का प्रमुख प्रशिक्षण स्थल है।
इसके अलावा, भारतीय दिग्गज और उभरते निशानेबाजों के प्रशिक्षण केंद्र कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आधुनिक लेजर टारगेट प्रणाली लगाने को भी मंजूरी दी गई, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में और सुधार होगा।
गहन प्रशिक्षण और समग्र एथलीट विकास को बढ़ावा देने के लिए SAI राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE) छत्रपति संभाजीनगर, SAI नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (NSNIS) पटियाला और SAI लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (LNCPE) त्रिवेंद्रम में तीन बहुउद्देश्यीय हॉल के निर्माण को स्वीकृति दी गई। इन हॉलों में इंडोर खेलों, शक्ति एवं अनुकूलन प्रशिक्षण, खेल विज्ञान सहयोग और पुनर्वास से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।शासी निकाय ने पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी स्थित SAI प्रशिक्षण केंद्र (STC) में 400 मीटर के आठ लेन वाले सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक के निर्माण को भी मंजूरी दी। इसके साथ ही, SAI मध्य क्षेत्रीय केंद्र (CRC) भोपाल में भी नए सिंथेटिक ट्रैक को स्वीकृति दी गई, जो पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट और ओलंपियन देश को दे चुका है।इन फैसलों को भारतीय खेल ढांचे को मजबूत करने और भविष्य के चैंपियनों को तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
