अवैध शराब पर सख्त हुयी रावत सरकार, इसी सत्र में लाया जायेगा विधेयक

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अवैध शराब के कारोबार पर त्रिवेन्द्र सरकार काफी सख्त नजर आ रही है। सीएम रावत ने सत्र के दौरान इस बात के संकेत भी दिये है कि इसी सत्र में सरकार अवैध शराब को लेकर विधेयक भी ला सकती है। सरकार को लग रहा है कि यह एक गंभीर मामला है कि इससे निपटने के लिए ठोस कानून के साथ साथ रणनीति भी बनानी होगी।

देहरादून,  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इस सत्र में एक विधेयक लाया जायेगा, जिसमें जहरीली शराब बेचने व अवैध तरीके से इस तरह का कारोबार करने वालों लिए सख्त प्राविधान होंगे। ताकि इस तरह के अपराधियों को कठोर दण्ड दिया जा सके।  जिसे लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत पहले ही साफ कर चुके है कि अवैध शराब के कारोबार करने वालो को छोडा नहीं जायेगा। उन्होंने कुछ दिनों पूर्व भी मीडिया रूब रू होते हुये कहा था कि यह प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा से जुडा हुआ मामला भी है, इस लिए इसे और अधिक गंभीरता के साथ देखा जा रहा है। साथ ही उस नेटर्वक को भी समाप्त किया जायेगा जो इसमें लगे हुये है।

गौरतलब है कि हरिद्वार जिले के पांच गांवों में जहरीली शराब पीने से 36 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, पचास से ज्यादा लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भी विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सरकार पर हमला बोला। सरकार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर विपक्ष ने सदन का बहिष्कार भी किया। 

इसके बाद विधानसभा में मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इस तरह के मामलों की जांच के लिए एक आयोग का गठन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हरिद्वार जनपद में हुई घटना की तह तक जाकर जांच की जायेगी। इसके लिए आईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की जा रही है, ताकि इस मामले की गहराई व सोर्स तक पंहुचा जा सके। 

उन्होंने कहा कि इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश पुलिस की संयुक्त कमेटी बनाई गई है। हरिद्वार और सहरानपुर के एसएसपी इस पूरे मामले का खुलासा कर चुके हैं कि शराब किनके द्वारा बनाई गई, कहां बनाई गई व किसके द्वारा बेची गई। हमारा प्रयास है कि इस मामले में संलिप्त सभी लोगों तक पहुंचा जाए।

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