पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी को मिलेगा ‘राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान’

Screenshot 2024-12-06 082659

शिक्षा के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक सेवा का सम्मान, 1 दिसंबर को होगा सम्मान समारोह

बठिंडा: पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) के लिए यह गर्व का क्षण है। विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी, को पंजाब कला साहित्य अकादमी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें 1 दिसंबर 2024 को अकादमी के 28वें वार्षिक पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा।

शिक्षा और शोध में उल्लेखनीय योगदान

प्रो. तिवारी ने अपने चार दशकों से भी अधिक शैक्षणिक जीवन में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में असाधारण कार्य किए हैं। अगस्त 2020 में पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के बाद, उन्होंने न केवल विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया बल्कि पंजाबी संस्कृति और गुरु साहिबानों के उपदेशों के प्रचार-प्रसार में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

प्रो. तिवारी के कार्यकाल की उपलब्धियां

  • नैक मूल्यांकन: विश्वविद्यालय को “ए प्लस” ग्रेड प्राप्त हुआ।
  • एनआईआरएफ रैंकिंग 2024: विश्वविद्यालय ने 83वां स्थान और फार्मेसी श्रेणी में 23वां स्थान अर्जित किया।
  • राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2022: सर्वश्रेष्ठ संस्थान श्रेणी में देश भर में तीसरा स्थान।
  • वैज्ञानिक उपलब्धियां: विश्वविद्यालय के 17 शिक्षक और 1 शोधार्थी ‘स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शीर्ष वैज्ञानिक सूची 2024’ में शामिल हुए।
  • छात्र उपलब्धियां: विश्वविद्यालय के छात्रों ने 16वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता जीती।

सिख गुरु साहिबानों के उपदेशों का प्रचार

प्रो. तिवारी ने सिख गुरु साहिबानों के उपदेशों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए कई पहल की हैं:

  • हिंद दी चादर श्री गुरु तेग बहादुर सिख इतिहास प्रकोष्ठ की स्थापना।
  • श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर सेमिनार और पुस्तक ‘सुदीक्षा’ का प्रकाशन।
  • गुरुद्वारा दर्शन पर आधारित कैलेण्डर का प्रकाशन।
  • दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन दर्शन पर पुस्तक पर कार्य।

प्रो. तिवारी का जीवन और दृष्टिकोण

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में पले-बढ़े प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी का जीवन पर्यावरण अनुकूल और सरल-सहज जीवनशैली पर आधारित है। उन्होंने मिज़ोरम विश्वविद्यालय, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर, और अब पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।