ऑपरेशन सिंदूर: आत्मनिर्भर रक्षा की शक्ति
स्वदेशी तकनीकों ने भारत की युद्ध तत्परता को दी नई धार: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट रूप से सिद्ध कर दिया है कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियाँ भारत की परिचालन तत्परता को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को राष्ट्रीय सोच बनाने में डीआरडीओ की भूमिका की सराहना की और कहा कि स्वदेशीकरण के प्रयासों से रक्षा क्षेत्र में तेज़ी से सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
77वें गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर डीआरडीओ के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने अनुसंधान एवं विकास में तेज़ सोच, त्वरित निर्णय और जोखिम लेने की क्षमता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आज युद्धक्षेत्र में “योग्यतम नहीं, बल्कि सबसे तेज़ जीवित रहता है” का सिद्धांत लागू होता है।
उन्होंने डीआरडीओ से निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और अकादमिक जगत के साथ सहयोगात्मक इकोसिस्टम अपनाने का आह्वान किया। तेजस लड़ाकू विमान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सह-विकास और ज्ञान साझा करने से भारत वैश्विक रक्षा शक्ति बन सकता है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि आत्मनिर्भरता के प्रयासों से रक्षा निर्यात बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है और 2029–30 तक 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने डीआरडीओ से ड्रोन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और गोला-बारूद जैसे क्षेत्रों में निर्यात उन्मुख सोच अपनाने को कहा।
इस अवसर पर डीआरडीओ पुरस्कार योजना 2024 के तहत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए और ‘आकाश’ मिसाइल प्रणाली पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया, जो स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की सफलता की कहानी को दर्शाती है।
