इंस्टाग्राम-फेसबुक का खौफनाक असर: कैथल में 365 बेटियां और महिलाएं हुईं लापता हर दिन गायब हो रही हैं किशोरियां, पुलिस भी पहुंच रही राजस्थान-पंजाब-यूपी तक
कैथल: जिले में बेटियों और महिलाओं के लापता होने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि इस साल अब तक कुल 365 मामले सामने आए हैं, जिनमें 92 अपहरण और 273 मिसिंग रिपोर्ट शामिल हैं। इनमें से 262 युवतियों व महिलाओं को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है, लेकिन अब भी 75 का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कई विवाहित महिलाएं अपने छोटे बच्चों को छोड़कर भी किसी युवक के साथ चली जाती हैं। खासकर 16 से 22 साल की लड़कियां इन मामलों में सबसे ज्यादा प्रभावित पाई गई हैं।
ताजा चार केस:
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चीका में कॉलेज छात्रा को युवक शादी का झांसा देकर भगा ले गया।
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कलायत में 19 वर्षीय युवती अस्पताल के बाहर से गायब हो गई।
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पूंडरी में 25 वर्षीय महिला घर से अचानक लापता हो गई।
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गुहला में 17 वर्षीय किशोरी को युवक बहला-फुसलाकर ले गया।
सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा हथियार
जांच में सामने आया है कि आरोपी युवक फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर लड़कियों से दोस्ती करते हैं। लगातार चैट और कॉलिंग से उनका भरोसा जीतकर उन्हें शादी और बेहतर जिंदगी के सपने दिखाते हैं। कई मामलों में युवतियां खुद भी इन रिश्तों में इतनी उलझ जाती हैं कि घर छोड़ने का फैसला कर लेती हैं।
राज्यों तक तलाश और कोर्ट में चुनौतियां
लापता बेटियों और महिलाओं की तलाश के लिए पुलिस को कई बार राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और यूपी तक जाना पड़ा। अधिवक्ता अजय कुमार गुप्ता के अनुसार, कई लड़कियां कोर्ट में बयान बदल देती हैं जिससे केस और पेचीदा हो जाते हैं।
अभिभावकों की जिम्मेदारी भी अहम
महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी सुनीता शर्मा ने कहा कि बच्चों को समय न देना भी बड़ी वजह है। यदि परिवार दोस्ताना माहौल दे तो बेटियां सोशल मीडिया पर अजनबियों के बजाय अपनों पर भरोसा करेंगी।
एसपी आस्था मोदी का संदेश
कैथल एसपी आस्था मोदी ने कहा कि नाबालिग के लापता होने पर तुरंत अपहरण का केस दर्ज किया जाता है। जिले में ट्रेसिंग दर बेहतर है, लेकिन माता-पिता को भी बच्चों को अच्छे-बुरे की पहचान करवाना और सोशल मीडिया का सही उपयोग सिखाना जरूरी है।
