हिमाचल: सरकार ने 1,100 करोड़ रुपये बाढ़ राहत राशि की जारी

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हिमाचल प्रदेश जिस भयानक आपदा से जूझ रहा है, उसका अंदाज़ा लगाना मैदानी क्षेत्रवासियों के लिए मुश्किल है। पूरा प्रदेश बाढ़, भूस्खलन और उफनती पहाड़ी नदियों की चपेट में है।
अनगिनत सड़कें, 50 से ज़्यादा पुल बह गए हैं, दर्जनों जानें चली गई हैं और जन-जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है। पीने के पानी से लेकर बिजली तक का संकट हर जगह है। प्रदेश में अभी तक लगभग 8,000 करोड़ रुपये के नुक़सान का अनुमान है।
चूँकि यह प्रदेश पहाड़ पर बस हुआ है इसलिए बारिश क़हर बनकर आती है। नदियाँ अचानक से विकराल रूप ले लेती हैं। बादल फटना भी यहाँ आम बात है जिससे परिस्थितियाँ और भी विकट हो जाती हैं। यह आपदा दैवीय है, और इसमें मनुष्य सिर्फ़ अपने विवेक, साहस और उपलब्ध संसाधनों से ही इनका सामना कर सकता है।
और इस चुनौती का पूरी बहादुरी और सूझ-बूझ से सामना किया है हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सूक्खू जी ने।
मीडिया के कैमरों से दूर श्री सूक्खू जी और हिमाचल सरकार ने जिस तरह से इस भयानक मुसीबत से मोर्चा लिया है, वह काबिल-ए-तारीफ़ है। पहले दिन से ही उन्होंने ख़ुद कमान सम्भाली है और लगातार इस आपदा से निपटने में लगे हुए हैं। श्री सूक्खू जी लगातार सड़क पर हैं और लोगों की जान-माल की हिफ़ाज़त कर रहे हैं।
हिमाचल सरकार ने 1,100 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत राशि जारी की है। सैकड़ों लोगों को दुर्गम परिस्थितियों से रेस्क्यू किया गया है, 70,000 से अधिक पर्यटकों को अब तक बाहर निकाला गया है और क़रीब 10,000 फँसे पर्यटकों को निकालने का प्रयास जारी है।
सिर्फ़ मनाली ही से अब तक 12,000 से ज़्यादा गाड़ियाँ बाहर निकाली गई हैं। और इस राहत व बचाव कार्य में सिर्फ़ मुख्यमंत्री ही नहीं, हिमाचल सरकार के सभी मंत्री, विधायक और पार्टी कार्यकर्ता व्यक्तिगत रूप से मौक़े पर मौजूद हैं और निगरानी कर रहे हैं।
बिना किसी प्रचार के श्री सूक्खू और हिमाचल सरकार के मंत्रियों और विधायकों ने अपना एक महीने का वेतन बाढ़ राहत कोष में दान देने का ऐलान किया है।
हिमाचल प्रदेश एक पर्यटन क्षेत्र है और यहाँ की बड़ी आबादी की आय का स्रोत यहाँ आने वाले पर्यटक हैं। बाढ़ की चपेट में आने से पर्यटन शून्य हो गया है और अनेक नागरिकों की आय फ़िलहाल रुक गई है। अगली चुनौती है बरसात के बाद सेब के किसान और बाग़ फसल उगाने को तैयार हों। जिसके लिए श्री सूक्खू ने नई तकनीक से सड़कें बनाने और पुलों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश पर आई इस आपदा में पूरा देश वहाँ की जनता के साथ खड़ा है और जान-माल की क्षति के प्रति संवेदनशील है।
श्री सुखविंदर सिंह सूक्खू की दिलेरी और प्रशासनिक क्षमता वाक़ई शानदार हैं, उन्होंने समय रहते ख़ुद मैदान में उतर कर साहसिक कार्य किए हैं। हिमाचल सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी सलाम – यह कैमरे और सुर्ख़ियाँ बटोरने से दूर – जनता के लिए अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखने का बेमिसाल जीता जागता उदाहरण है।