खराब मौसम बना बाधा! उत्तराखंड में ग्लेशियल झील सर्वेक्षण अभियान फिलहाल रुका
देहरादून:
उत्तराखंड में प्रकृति एक बार फिर अपनी शक्ति दिखा रही है! लगातार खराब मौसम और ऊँचे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के चलते राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) को ग्लेशियल झीलों के जोखिम आकलन अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।
यह सर्वेक्षण उत्तरकाशी और चमोली जिलों की ऊँचाई पर स्थित झीलों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के बढ़ते खतरे का अध्ययन करने के लिए शुरू किया गया था।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि जैसे ही मौसम साफ़ होगा, विशेषज्ञ टीमें फिर से हिमालय की ओर रवाना होंगी।
इस मिशन का मकसद है — झीलों की गहराई, चौड़ाई और स्थिरता का पता लगाकर यह समझना कि कहीं वे किसी बड़ी आपदा की वजह तो नहीं बन सकतीं!
अधिकारियों के अनुसार, राज्य की 13 ग्लेशियल झीलें “संभावित रूप से खतरनाक” श्रेणी में हैं।
इनमें पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी जिलों की झीलें शामिल हैं — जहाँ ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और तापमान बढ़ने से झीलों का आकार पिछले कुछ सालों में कई गुना बढ़ गया है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केदारताल और घास्टोली ताल जैसी झीलें “अत्यधिक जोखिम” वाली हैं।
कमज़ोर मोरेन (मिट्टी-पत्थर की दीवारें) और बढ़ता जलस्तर इन्हें भारी बारिश, हिमस्खलन या भूकंप के दौरान फटने के खतरे में डालते हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि यह अभियान हिमालयी सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा — ताकि समय रहते चेतावनी मिल सके और किसी संभावित त्रासदी से पहले लोगों को सुरक्षित किया जा सके
