EXCLUSIVE: एससीईआरटी की संवेदनहीन व्यवस्था भयभीत कार्मिक

see

देहरादून। दस्तावेज ने पहले ही आशंका जता दी थी कि निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के प्रदेश में एससीईआरटी और डायट खोलने के अवैधानिक आदेश से कई परिवारों की जान को खतरा उत्पन्न हो सकता है। दस्तावेज ने पर राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन अधिनियम 2005 के तहत मुकदमा होने की आशंका जतायी थी।  आज एससीईआरटी में कार्यरत प्रवक्ता पुण्डरीकाक्ष शर्मा की अकारण मृत्यु हो गयी। परिषद में कार्यरत दो प्रवक्ताओं शिवानी राणा चन्देल व देवराज सिंह राणा को जब पहले ही कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी थी तो कल पुण्डरीकाक्ष शर्मा को कार्यालय क्यों बुलाया गया ? केन्द्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा जब स्पष्ट गाइडलाइन थी कि प्रशिक्षण व अकादमिक संस्थान अभी बन्द ही रहेंगे तो आखिर किसकी अनुमति से एससीईआरटी और डायट खोले गये ?
राजीव गाँधी नवोदय विद्यालय में स्थित वर्चुवल क्लास के कई कर्मियों में पहले ही कोविड की पुष्टि थी। जैसे आज सभी प्रकार के प्रशिक्षणों पर रोक लगा दी गयी है यदि पहले ही ये रोक लगायी होती तो शायद एक जान बच जाती और इतने परिवारों की जान को खतरा न होता।

दो माह पूर्व दस्तावेेेज न्यूज पोर्ट पर प्रकाशित समाचार पत्र। जिसके माध्यम से आगाह किया गया था ।

एससीईआरटी में कार्यरत लगभग 15-20 कार्मिकों में कोविड-19 के लक्षण जुकाम, बुखार व खाँसी है। ऐसे में परिषद में कार्यरत लगभग 100 कार्मिकों के परिवारों को तथा समुदाय को परिषद से कोविड-19 के संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो गया है। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए महानिदेशक विधालयी शिक्षा ने आज से अग्रिम आदेशों तक एससीईआरटी में वर्क फ्राॅम होम लागू कर दिया है। वहीं इस संबंध में अकादमिक एवं शोध निदेशक सीमा जौनसारी से दस्तावेज ने इस संबंध में जानकारी मांगी गयी तो उन्होंने किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी।