एक्सक्लूसिवः उत्तराखंड सरकार का उन्नींदी उच्च शिक्षामंत्री, सेमेस्टर सिस्टम खत्म या लागू नहीं मालूम
देहरादूनःउत्तराखंड के उच्चशिक्ष मंत्री धन सिंह रावत की राजनीतिक सोच एक छात्र नेता की भांति है। उनके राजनीतिक फैसलों और कार्यप्रणाली में कोई परिपक्वता नजर नहीं आती। वह कि सी छात्र नेता की भांति जबरदस्ती उच्चशिक्षा मंत्रालय को खींच रहे हैं। उन्हें नहीं मालूम वह उच्चशिक्षा के लिए क्या करेंगे? उनके पास ऐसा कोई विजन नहीं जो युवाओं को नायाब जरिया दे सके। न ही उनके पास ऐसा कोई माॅडल है जो विश्वविद्यालयों के ढीले होचु के पुर्जोंको कस सके।

कुलमिलाकर देखाजाय तो उच्चशिक्षामंत्री आरएसएस के कृपापात्र हैं।लेकिन यह प्रदेश के होनहारों के साथ किसी विश्वासघातसे कम नहीं है। दरअसल डबलइंजन की जिस सरकार का सपना युवाओं को दिखाया गयाथा वह हकीकत में कहीं भी नहीं है।डबलइंजन की सरकार तोबनी, लेकिन इस सरकार में उच्चशिक्षामंत्रालय अनुभवही नव्यक्ति को थमादिया। उच्चशिक्षामंत्री का फोकस प्रदेश की उच्चशिक्षा की बजाय राष्ट्रीय ध्वज की ऊंचाई पर ज्यादा है। वह ऐसी घोषणाएं करते हैं जो वजूदमें कम आती हैं और मीडिया की सुर्खियां ज्यादा बनती है।बिडम्बना देखिए कि छात्र संघचुनाव के दौरान उत्तराखंड सरकारके इस उन्नीं दी उच्चशिक्षामंत्री ने सेमेस्टरसिस्टम खत्मकरने की घोषणा की, लेकिन उसके बारे में न तो उच्च शिक्षा विभाग को कुछमालूम है और न ही विश्वविद्यालयों को।प्रदेशभर के लाखों छात्र संकट में फंसे हं, लेकिन साहब है कि न तो सुनते हैं और न ही समझने की कोशिशकरते हैं।

मुसीबत में छात्र, घोषणा ने उलझाया
छात्र संघचुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को लाभपहुंचाने के लिए प्रदेश के उच्चशिक्षामंत्री डा. धन सिंह रावत ने जो दांव चला वह कितना कारगर हुआ परिणाम सब के सामने हैं। लेकिन इस दांव ने प्रदेशभर में लाखों छात्र-छात्राओं के सामने मुसीबत खड़ीकर दी है। दरअसल छात्र संघचुनाव के दौरान उच्चशिक्षामंत्री धन सिंह ने घोषणा की थी कि प्रदेश में सेमेस्टर सिस्टम को खत्मकर दिया जायेगा।मंत्री की यह घोषणा आजतक परवान नहीं चढ़ी , लेकिन इससे काॅलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की पढ़ाई ठप होचुकी है। दूसरी ओर प्रकाशकों ने भी सेमेस्टर सिस्टम की पुस्तकें छापनी बंद करदी। पुस्तकं भी नहीं छपने से छात्रों के पास किताबें नहीं है। ऐसे में छात्र-छात्राएं असमंजस की स्थिति में है। वह निणर्य नहीं कर पारहे हैं कि वह सेमेस्टर प्रणाली के लिए तैयारी करें या फिरवार्षिक पैटर्न के हिसाबसे पढ़े।
सेमेस्टर प्रणाली समाप्त होने की खबर का असर
1- श्रीदेव सुमन और कुमाऊं विवि में द्वितीय सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम नही हुआ जारी इन छात्रों का भी समाप्त होगा सेमेस्टर सिस्टम या नही असमंजस
2- तृतीय सेमेस्टर में या द्वितीय वर्ष में होंगे प्रवेश सभी है आदेश के इंतजार में असमंजस
3- सभी कॉलेजो में प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है यह छात्र सेमेस्टर की किताबें पड़ेंगे या विश्वविद्यालय अलग सिलेबस जारी करेगी असमंजस
4- सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने की खबर से मार्केट में नही आई तृतीय सेमेस्टर की किताबें सभी पब्लिशर्स व बुकसेलर है असमंजस में।
5- जल्द आदेश नही हुआ तो प्रथम व तृतीय सेमेस्टर के छात्रों का शिक्षण कार्य नही होगा पूरा दिसम्बर में होनी है परीक्षाए।

विश्विद्यालयों से सुझाव मांगा गया था। विवि ने छात्र हित को देखते हुए अपना सुझाव शासन को सौप दिया है। अब निर्णय सरकार को लेना है। फिलहा तो स्थिति असमंजस की बनी हुयी है। अभी पुरानी व्यवस्था के आधार पर की प्रवेश प्रकृया संपन्न करायी गयी है। शासन का जैसे भी निर्देश मिलेगा उसका पाल किया जायेगा।
उदय सिंह रावत , कुलपति श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय
