EXCLUSIVE: राजकीय शिक्षक संघ के दो फाड़ होना तय, प्रांतीय अध्यक्ष डिमरी पर मनमानी का आरोप
देहरादून। राजकीय शिक्ष संघ कार्यकारिणी की लगाई खुलकर सामने आ गयी है। राजकीय शिक्षक के प्रांतीय अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी पर चैतरफा मनमानी के आरोप गढवाल से कुमाउ तक के शिक्षक संघ के पदाधिकारी लगा रहे है। राजकीय शिक्षक संघ उतराखण्ड सरकार से मान्यता प्राप्त संघ है, जिसे सेवा संघो की सेवा निमावली 1979 के निमयों के अनुसार मान्यता है। जिसके तहत ही संघ को सुचारू रूप से सचालन के लिये सगठन का सँविधान बनाया गया है ,जिसमें पदाधिकारियो के अधिकार व कार्य दायित्व निर्धारित किये गए है।
वहीं इस पूरे घटना क्रम को लेकर राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारी और सदस्य साप तौर पर प्रांतीय अध्यक्ष पर आरोप लग रहे है कि वह राजकीय शिक्षक संघ के संविधान से भी हटकर कार्य कर रहे है। जिससे विवाद खडा हो गया है। आलम यह है कि राजकीय शिक्षक संघ की इस फूट से तय है कि आने वाले कुछ दिनों में राजकीय शिक्षक संघ के दो फाड होना तय है।

वहीं संघ के महामंत्री डॉ सोहन माजिला का कहना है प्रांतीय अध्यक्ष लगातार संगठन के सँविधान को दरकिनार कर मुट्ठी भर गुटबाजो के सहारे मनमानी कर रहे है , कोई भी निर्णय लेने से पूर्व न संघ की बैठक करना उचित समझते , न ही विचार विमर्श करते है, जिससे शिक्षक धड़ो में बट रहे है, जिससे सगठन की ताकत क्षीण हो रही है। राजकीय शिक्षक संघ के ब्लॉक इकाइयों के 5 वर्ष से गठन नही हुया है, जबकि जनपद इकाइयों को 5 वर्ष पूर्ण होने वाले है।
संघ के महामन्त्री 2019 से ब्लॉक व जनपद इकाइयों के गठन हेतु निर्देश दे रहे है, किन्तु प्रान्तीय अध्यक्ष ब्लॉक व जनपद के अधिवेशन की अनुमति अपनी राजनैतिक पहुच से निरस्त करवा देते है ,इसका ताजा उदाहरण 18 जनवरी 2021 को जनपद देहरादून के ब्लॉक चुनाव जिला अधिकारी के अनुमति के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी से प्राप्त अनुमति उसी दिन निरस्त करा दी।
प्रान्तीय महामंत्री का कहना है, नवम्बर 2019 में प्रान्त का कार्यकाल पूर्ण हो चुका था, किन्तु प्रान्तीय चुनाव न करा कर प्रान्तीय अध्यक्ष ने बिना कार्यकरणी में प्रस्ताव पास किये, अपना विशेषाधिकार ले बल पर कार्यकाल बढ़ा लिया। जब कि तब चुनाव हो जाते तो सगठन की ये फजीहत नही होती।
गौरतलब हो कि निदेशक द्वारा संघ को 1 फरवरी 2021 को एक पत्र दिया है जिसमे शिक्षा मंत्री जी द्वारा बोर्ड परीक्षा के बाद चुनाव कराने के निर्देश दिए गए है, लेकिन कमल किशोर डिमरी बोर्ड परीक्षा के मध्य में प्रान्तीय चुनाव कराने को इतने सक्रिय है, इसके पीछे का खेल शिक्षक नही समझ पा रहे है।
सँविधान के अनुसार संघ की सदस्यता प्रत्येक सत्र में होती है, नया शैक्षिक सत्र 15 अप्रैलसे आरम्भ हो चुका है, ऐसे में बिना सदस्य्ता के सीधे प्रान्त का चुनाव करना क्या विधि सम्म्मत है ? जबकि नवीन सत्र में विद्यालय शाखा गठन होना है।
उधर इस मामले पर प्रान्तीय महामन्त्री का कहना है कुछ महत्वकांशी साथी प्रान्तीय अध्यक्ष को ढाल बनाकर सगठन को खत्म करना चाहते है, किन्तु शिक्षक चुपचाप एक-एक घटना का मूल्यांकन कर रहा है।
वही चुनाव को लेकर राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी ने साफ करते हुये कहा कि वह इस प्रकार के आरोपों को निराधार बताते है। उनका कहना है कि जो भी लोग इस प्रकार के आरोप लगा रहे है वह संगठन की समझ नही रखते है। डिमरी ने दस्तावेज को बताया कि पूरे चुनाव की रूप-रेखा राजकीय शिक्षक संघ के संविधान के अनुसार ही तय की जा रही है। जहा तक संघठन में फूट का सवाल है तो यह एक काल्पनिक है जो लोग इस बात की सूचना दे रहे है कि संघ में ताल-मेल नही है वह संघ को बदनाम करने की नियत रखते है। डिमरी का कहना है कि जो कुछ लोग इस बात का दावा कर रहे है कि संघ में दो फाड हो सकते है वह इस प्रकार बेवजह की बात कर रहे है, जिनका कोई आधार नही है।
