EXCLUSIVE: यूपीसीएल में बिजली खरीद के नाम पर करोडों का घोटाला, चहेती कंपनी ने दबाये 61 करोड़
देहरादून। उत्तराखंड पाॅवर काॅरापोरेशन में एक बडा घोटाला सामने आया है। निगम प्रबंधन के साथ पहुंच रखने वाली कंपनी ने नियम कायदों को ताकपर रखकर निगम के तकरीबन 61 करोड़ रूपये दबाकर रखे हुये है। लेकिन कंपनी पर अधिकारियों की ऐसी महरबानी है कि संबंधित अधिकारियों की चेतावनी के बाद भी कंपनी यूपीसीएल का पैसा देने के लिए तैयार नहीं है।

‘दस्तावेज डाॅट इन’ को मिले दस्तावेजों से साफ होता है कि निगम प्रबंध की मिलीभगत से उर्जा निगम का तकरीबन 61 करोड़ रूपये सिर्फ इस लिये फंस गये है कि कंपनी को संबंधित अधिकारियों की ओर से चेतावनी देने के बाद भी पैसे जमा न करने का आश्वासन उपर से मिलता रहा। जिसका नतीजा है कि आज संबंधित कंपनी पर निगम का तकरीबन 61 करोड़ रूपये का बकाया है, लेकिन कंपनी देने के लिए तैयार नही है।
क्या है प्रकरण
पाॅवर काॅरपोरेशन द्वारा अपने पाॅवर परचेज अनुबंधों के माध्यम से एवं अपनी प्रतिदिन की आवश्यकताओं के आकलन के आधार पर बाजार से बिजली की खरीद की जाती है। इसी खरीदी गई बिजली के द्वारा प्रदेशभर के बिजली उपभोक्ताओं की विद्युत मांग की पूर्ती की जाती है। जिस दिन उपभोक्ताओं की मांग उपलब्धता से कम रह जाती है उस दिन इस अतिरिक्त बिजली को पाॅवर काॅरपोरेशन द्वारा निगम से संबद्ध मै0 क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, अंतरिक्ष भवन, 22 केजी मार्ग कनाॅट प्लेस नई दिल्ली द्वारा खुले बाजार में बेच दी जाती है।
क्या कहता है नियम
उत्तराखंड पाॅवर काॅरपोरेशन की बिजली को बेचने के लिए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग एवं उत्तराखंड शासन की ओर से नियमावली बनायी गयी है। इसी नियमावली के आधार पर बिजली की खरीद और बिजली को बेचा जा सकता है। दस्तावेज को मिली जानकारी के अनुसार मै0 क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को पाॅवर काॅरपोरेशन से हुए अनुबंध की शर्तो के अनुसार बेची गई बिजली की धनराशि किसी भी स्थिति में तीन दिन के भीतर उत्तराखंड पाॅवर काॅरपोरेशन में जमा करने की शर्तो का पालन करना है। ऐसा न करने पर एक वर्ष के भीतर ही संबंधित कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाता है।
कैसे हुआ 61 करोड़ का खेल

समाचार पोर्ट दस्तावेज के सूत्र बताते है कि कमीशन के इस खेल के चलते अतिरिक्त सरप्लस बिजली की विक्री मै0 क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अक्टूबर 2016 से जून 2020 के बीच में की गई थी उससे प्राप्त कमाई में तकरीबन 61 करोड़ रूपये इस कंपनी ने अपने पास दबाकर रखे हुये है। जबकि नियमानुसार तीन दिनों के भीतर यह पैसा उर्जा निगम के खाते में जमा किया जाना था।
आर्थिक तंदी से जूझ रहा उर्जा निगम
अधिकारियों की मनमर्जी और चहेतों से वसूली के चक्कर में उर्जा निगम के बडे अधिकारियों ने निगम को 61 करोड़ का चूना लगा दिया है। जबकि ताज्जुब की बात यह है कि इस कोरोना काल में जहां राजस्व की कमी से जूझते हुए पाॅवर काॅरपोरेशन को अपने कर्मचारियों को वेतन देने मैं परेशानियों का सामना करना पड रहा है तो वही उर्जा निगम इस कंपनी पर इतना मेहरवान है कि अभी तक उर्जा निगम के प्रबंधन की ओर से उक्त कंपनी को न तो कोई लीगल नोटिश दिया गया है और न तय समय सीमा पर बकाया ब्याज के साथ जमा करने के निर्देश दिये गये है।
निगम के अधिशाशी अभियंता का पत्र भी नही आया काम
उर्जा निगम में हो रहे फर्जी वाडे की भनक लगते ही संबंधित अधिकारी ने उक्त कंपनी को पत्र लिखा और तत्काल यूपीसीएल के बकाये का भुगतान करने को कहा गया। लेकिन उक्त अधिकारी के पत्र जारी करने के बावजूद भी उक्त कंपनी ने उर्जा निगम का भुगतान नही किया। इस संबंध में अधिकारी द्वारा जब उच्चअधिकारियों से वार्ता की गयी तो उन्हें अगली कार्यवाही करने से पूर्व निगम प्रबंध की अनुमति लेने के लिए कहा गया। जिसके बाद पुनः उक्त अधिकारी द्वारा नोटशीट के माध्यम से उक्त प्रकरण में उच्चअधिकारी से वार्ता करने का अनुरोध किया गया तो वह अनुरोध आजतक अनुरोध ही बना रहा।
चर्चा में उर्जा निगम के 61 करोड़
एक ओर कर्मचरियों पर अनुशासन का डंडा चलाने वाले उच्चपदों पर बैठे अधिकारी यह तय नहीं कर पा रहे है कि इस पैसे की वसूली कैसे की जाय। इस लिए निगम का हर कर्मचारी दबी जुबान में यह मान रहा है कि उक्त कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए यह सब उपर के स्तर से किया गया है। अगर ऐसा नहीें होता तो जिस कंपनी को तीन दिन के भीतर बिजली का भुगतनान करना था वह 4 साल भाद भी भुगतान नही कर पायी। जबकि इस धनकारी को ब्याज सहित जोडा जाय तो यह तकरीबन 75 करोड तक पहुंच गयी है।
जारी..कैसे हुआ 61 करोड का खेल किस अधिकारी ने कहा अभी मत करो भुगतान. अगली खबर में…
