शाम की सख्ती: मध्य दिल्ली में सीएक्यूएम का निरीक्षण अभियान
करोल बाग–राजेंद्र नगर में खुले में कचरा फेंकने व जलाने पर कार्रवाई, 20 उल्लंघन दर्ज
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने मध्य दिल्ली में शाम के समय निरीक्षण अभियान चलाकर खुले में नगर निगम के ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) और बायोमास फेंकने व जलाने पर रोक से जुड़े नियमों के पालन की जांच की। इस अभियान का उद्देश्य वायु प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान करना और उन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
सीएक्यूएम के उड़न दस्ते द्वारा किए गए निरीक्षण में करोल बाग और राजेंद्र नगर के इलाके शामिल रहे। समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, कुल 20 मामले दर्ज किए गए, जिनमें बायोमास/एमएसडब्ल्यू जलाने के 2 और एमएसडब्ल्यू फेंकने के 18 मामले शामिल हैं। पाया गया कि कचरा जलाने की घटनाएं अधिकतर हीटिंग के उद्देश्य से हो रही थीं। कई स्थानों पर एमएसडब्ल्यू को निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे के साथ मिला हुआ पाया गया, जिससे आग लगने और वायु प्रदूषण बढ़ने का खतरा है।
करोल बाग क्षेत्र में जिन प्रमुख स्थानों पर उल्लंघन दर्ज किए गए, उनमें गुरु रविदास मार्ग, विष्णु मंदिर मार्ग, कृष्णा नगर (गंगा मंदिर मार्ग–हरध्यान सिंह रोड चौराहा), गुरुद्वारा रोड और गली नंबर 6 के चौराहे शामिल हैं। इन स्थानों पर नगर निगम के ठोस अपशिष्ट को खुले में फेंकने और जलाने के मामले सामने आए। इस संबंध में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को जिम्मेदार एजेंसी के रूप में चिह्नित किया गया है।
आयोग ने एमसीडी सहित संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि एमएसडब्ल्यू और बागवानी कचरे को सड़कों या यातायात वाले क्षेत्रों में जमा न होने दिया जाए, कचरे को तुरंत उठाया जाए और केवल अधिकृत स्थलों पर ही निपटान किया जाए। साथ ही, अनधिकृत डंपिंग के खिलाफ सख्त प्रवर्तन, जुर्माना, पुनरावृत्ति रोकने और तत्काल सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सीएक्यूएम ने एमसीडी को यह भी अवगत कराया कि उसके अधिकार क्षेत्र में एमएसडब्ल्यू/बायोमास की खुली डंपिंग और जलाने की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। लगातार मिल रही शिकायतें प्रवर्तन में प्रणालीगत कमियों और जीरो टॉलरेंस के वैधानिक निर्देशों के पालन में ढिलाई की ओर इशारा करती हैं। आयोग ने उल्लंघनों को रोकने, जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि एमएसडब्ल्यू जलाने पर पूर्ण रोक लगाई जा सके।
आयोग ने दोहराया कि खुले में कचरा फेंकना और जलाना वायु प्रदूषण के प्रमुख स्थानीय स्रोत हैं, खासकर शाम और रात के समय। ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत निरीक्षण और कार्रवाई दिल्ली-एनसीआर में नियमित रूप से जारी रहेगी, ताकि ऐसे स्रोतों की पहचान कर उन्हें समाप्त किया जा सके।
