बड़ी खबर-गुस्सा: विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन ने ऊर्जा सचिव को दिलायी त्रिपक्षीय समझौते की याद

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देहरादून। उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन ने उपनल के माध्यम से कार्योजित संविदा कार्मिकों को वर्ष में दो बार मंहगाई भत्ता दिये जाने की मांग तेज कर दी है। संठन ने इस संबंध में अध्यक्ष/सचिव (ऊर्जा), उत्तराखण्ड शासन को पत्र लिखकर तत्काल कार्मिकों को मंहगाई भत्ता दिये जाने मांग की है।

शुक्रवार को उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन की एक आवश्यक बैठक आहुत की गयी। बैठक में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष को मंहगाई भत्ते के संबंध में शासन स्तर पर वार्ता एवं पत्र व्यवहार के लिए एकाधिकार दिया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने एक स्वर में शासन को अवगत कराया कि ऊर्जा के तीनों निगमों में सैकड़ो कार्मिक उपनल के माध्यम से विभिन्न पदों पर कार्योजित हैै। प्रदेश के सम्मानित उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति प्रदान करने हेतु विभिन्न कार्यालयों/विद्युत उपसंस्थानों/परियोजनाओं/लाईन/मीटर रीडिंग/कैश कलेक्शन/बिलिंग सहित कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का सम्पादन पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी उपरोक्त संविदा कार्मिकों का मा0 उच्च न्यायालय व मा0 औद्योगिक न्यायाधिकरण के निर्णयानुसार न तो नियमितिकरण किया गया और न ही समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जा रहा है। जिससे कार्मिकों में रोस है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने कहा कि कर्मचारियों के साथ खिलावड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मंहगाई के दौर में किसी भी प्रकार का मंहगाई भत्ता नहीं दिया जाता है, जिससे इन कार्मिकों के कार्य करने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता नजर आ रहा है। जबकि उपाकालि के अन्तर्गत स्वंय सहायता समूह के माध्यम से कार्योजित कार्मिकों को वर्ष में दो बार मंहगाई भत्ता दिया जाता है, जिससे प्रतिवर्ष उनके वेतन में बढोत्तरी होती रहती है। इससे यह भी प्रतित होता है कि प्रबन्धन के कुछ उच्चाधिकारियों के प्रभाव के चलते उपनल कार्मिकों को जानबूझकर आन्दोलन के लिए विवश किया जा रहा है जबकि संगठन सदैव से ही वार्ता के माध्यम से कार्मिक समस्याओं के समाधान के पक्षधर रहा है। विनोद कवि ने कहा कि पूर्व में तत्कालिन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा जी के प्रतिनिधि के रूप विधायक सुबोध उनियाल व संसदीय सचिव (ऊर्जा) विजय पाल सिंह सजवाण जी की उपस्थिति में तीनों निगमों के प्रबन्ध निदेशक व संगठन के प्रतिनिधियों के मध्य एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे जिसके अनुरूप तीन माह के अन्दर तीनों निगमों में उपनल के माध्यम से कार्योजित संविदा कार्मिकों को विभागीय संविदा पर लिये जाने कस निर्णरू लिया गया था। लेकिन शासन द्वारा अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने शासन से पुन संविदा कार्मिकों के अल्प वेतनमान, मंहगाई व पूर्व में हुए समझौतों को दृष्टिगत रखते हुए उपाकालि में स्वंय सहायता समूह के कार्मिकों की भांति वर्ष में दो बार मंहगाई भत्ता दिये जाने की मांग की।

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