बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सियासी घमासान: चुनाव आयोग ने विपक्ष पर कसा तंज, पूछा– क्या फर्जी वोटिंग की इजाजत दें?

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पटना, जुलाई 2025:  बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर सियासी तापमान चरम पर है। विपक्ष सरकार पर मतदाता नामों की कथित ‘छंटनी’ को लेकर हमला बोल रहा है, जबकि संसद से लेकर बिहार विधानसभा तक इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा जारी है। इसी बीच, चुनाव आयोग ने पहली बार इस विवाद पर खुलकर बयान दिया है, जिसमें उसने विपक्ष की आलोचना को नकारते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

चुनाव आयोग का दो टूक सवाल: “क्या फर्जी मतदाताओं को वोट डालने देना चाहिए?”

चुनाव आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि भारत का संविधान लोकतंत्र की जननी है, और चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि वह हर हाल में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करे। आयोग ने पूछा:

क्या चुनाव आयोग कुछ लोगों के विरोध से डरकर फर्जी और मृत मतदाताओं को वोट डालने की छूट दे दे? क्या जो मतदाता स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं, फर्जी या विदेशी हैं, उन्हें मतदाता सूची में बनाए रखना संविधान के खिलाफ नहीं होगा?”

आयोग ने आगे कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता ही किसी लोकतंत्र की नींव होती है, और इसे राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।

बिहार में 56 लाख नाम हो सकते हैं सूची से बाहर: विपक्ष ने जताई आपत्ति

बिहार में चल रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत चुनाव आयोग ने मतदाता डेटा का गहन विश्लेषण शुरू किया है। आयोग के मुताबिक:

  • 20 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनका निधन हो चुका है।

  • 28 लाख लोग अपने स्थायी पते से पलायन कर चुके हैं।

  • करीब 1 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

  • 7 लाख मतदाता ऐसे मिले हैं जो एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत हैं।

इन आंकड़ों के आधार पर चुनाव आयोग का मानना है कि कुल मिलाकर लगभग 56 लाख नाम सूची से हटाए जा सकते हैं, जिससे बिहार में मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव आ सकता है। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया पूर्वाग्रही और राजनीतिक रूप से प्रेरित है, और इससे चुनावी संतुलन बिगड़ सकता है।

90% से अधिक मतदाता प्रपत्र प्राप्त: आयोग ने दी जानकारी

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक 7.7 करोड़ से अधिक मतदाता फॉर्म, यानी 90.89% मतदाताओं के विवरण, सफलतापूर्वक एकत्र कर लिए गए हैं और उनका डिजिटलीकरण भी पूरा हो चुका है। हालांकि अभी भी करीब 15 लाख मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अपने गणना प्रपत्र वापस नहीं किए हैं। आयोग ने बताया कि इन प्रपत्रों को एकत्र करने के लिए वह राजनीतिक दलों के साथ मिलकर विशेष अभियान चला रहा है।

क्या कहता है चुनाव आयोग?

हमारा उद्देश्य किसी को वंचित करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करना है। मतदाता सूची को सही करना, मृत, पलायन कर चुके, या दोहराए गए नामों को हटाना– यह प्रक्रिया लोकतंत्र की शुद्धता बनाए रखने के लिए जरूरी है।”

 लोकतंत्र की नींव पर सवाल या सुधार?

बिहार में चल रहा यह मतदाता सूची सुधार अभियान जहां चुनाव आयोग के अनुसार लोकतंत्र की मजबूती का प्रयास है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक हस्तक्षेप और वोटर सर्जरी करार दे रहा है। सवाल यह है कि क्या यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करेगी या सियासी टकराव को और गहरा?

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https://voters.eci.gov.in/

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