आर्थिक समीक्षा: ‘विकसित भारत’ की धुरी बनेगी कृषि

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कृषि और सहयोगी क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि से समावेशी विकास और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया बल

संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2025–26 के अनुसार, कृषि क्षेत्र ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा और समावेशी विकास को आगे बढ़ाते हुए करोड़ों लोगों की आजीविका को बेहतर बनाएगा। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय कृषि की स्थिति लगातार सुदृढ़ हुई है, जिसका मुख्य कारण कृषि के सहयोगी क्षेत्रों में हुआ मजबूत विकास है।

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि हाल के वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है, जबकि पशुधन, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों की औसत वार्षिक विकास दर 4.4 प्रतिशत रही है, जो स्थिर और संतुलित प्रगति को दर्शाती है।

शुधन और मत्स्य पालन क्षेत्र कृषि विकास के प्रमुख वाहक बनकर उभरे हैं। पशुधन क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि मत्स्य उत्पादन में भी तेज़ उछाल देखने को मिला है। इसके साथ ही, फसल क्षेत्र ने भी स्थिर विकास दर के साथ योगदान दिया है।

बागवानी क्षेत्र, जो कृषि जीवीए में लगभग एक-तिहाई हिस्सेदारी रखता है, भारत की कृषि विकास यात्रा का उज्ज्वल पक्ष बनकर उभरा है। फलों, सब्जियों और अन्य बागवानी फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी ने न केवल घरेलू खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि भारत को वैश्विक कृषि बाजार में भी अग्रणी स्थान दिलाया है। भारत अब विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक और फलों व सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन चुका है।

आर्थिक समीक्षा का निष्कर्ष है कि कृषि और इसके सहयोगी क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि के मजबूत स्तंभ हैं। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र न केवल जीडीपी में योगदान बढ़ाएगा, बल्कि ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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