आर्थिक समीक्षा 2025-26: उद्योग की रफ्तार तेज, जीवीए में 7% की मजबूती
पहली छमाही में विनिर्माण और प्रमुख इनपुट क्षेत्रों के दम पर भारत का औद्योगिक प्रदर्शन सशक्त
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में भारत के औद्योगिक क्षेत्र का प्रदर्शन मजबूत बना रहा है। वास्तविक आधार पर उद्योग के सकल मूल्य संवर्धन (GVA) में साल-दर-साल 7.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष में देखी गई 5.9 प्रतिशत की नरमी के बाद उल्लेखनीय सुधार को दर्शाती है।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संसद में समीक्षा पेश करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 26 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण GVA क्रमशः 7.72 प्रतिशत और 9.13 प्रतिशत बढ़ा। इस मजबूती के पीछे संरचनात्मक सुधार, उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण की ओर बढ़ता रुझान, कॉरिडोर-आधारित औद्योगिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग की अहम भूमिका रही।
समीक्षा में कहा गया है कि भारत के कुल विनिर्माण मूल्य संवर्धन में मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की हिस्सेदारी बढ़कर 46.3 प्रतिशत हो गई है। उत्पादन-से-जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन व परिवहन क्षेत्रों में घरेलू क्षमता विस्तार ने इस प्रगति को बल दिया है।
मुख्य इनपुट उद्योगों में भी मजबूती देखने को मिली। भारत इस्पात और सीमेंट उत्पादन में वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वहीं, वित्त वर्ष 25 में 1,047.52 मिलियन टन कोयला उत्पादन के साथ कोयला क्षेत्र ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र भी तेज़ विकास पथ पर बने रहे।
आर्थिक समीक्षा का निष्कर्ष है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स और व्यापार सुगमता में सुधार के चलते भारत का औद्योगिक क्षेत्र भविष्य में भी तेज़ वृद्धि के लिए तैयार है। आगामी दौर में नवाचार, अनुसंधान एवं विकास, कौशल विकास और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा।
