‘क्या आप चाहते हैं कि हम पूरा देश चलाएं?’: बुनियादी ढांचे पर याचिका देख सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें सड़कों, पुलों, बिजली के तारों समेत सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रखरखाव को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “क्या आप चाहते हैं कि हम पूरा देश चलाएं?”

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि याचिका में इतनी अलग-अलग तरह की मांगें की गई हैं कि यह किसी “शॉपिंग मॉल” की तरह लगती है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, लेकिन इस तरह के व्यापक और असंख्य निर्देश जारी करना व्यावहारिक नहीं है। अदालत ने कहा कि जब तक मुद्दे विशिष्ट और स्पष्ट न हों, तब तक ऐसे आदेश देना मुश्किल है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट देते हुए याचिका खारिज कर दी कि वह चाहें तो संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाई कोर्ट में उचित तरीके से तैयार याचिका दाखिल कर सकते हैं। अदालत का कहना था कि राज्यों की वित्तीय स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए इस तरह के मामलों पर विचार करने के लिए हाई कोर्ट अधिक उपयुक्त मंच है।

याचिका में केंद्र और अन्य अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे सड़कों, पुलों और बिजली के तारों जैसे सार्वजनिक ढांचे का नियमित निरीक्षण, रखरखाव और सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित करें। इसके अलावा एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय सुरक्षा ऑडिट समिति बनाने का भी अनुरोध किया गया था, जिसमें सिविल इंजीनियर, बुनियादी ढांचा विशेषज्ञ, फोरेंसिक जांचकर्ता और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हों।

हालांकि अदालत ने कहा कि याचिका में मांगे गए निर्देश “असीमित और व्यापक” हैं, जिनका बड़ा वित्तीय प्रभाव भी पड़ सकता है, इसलिए इस रूप में इस पर सुनवाई संभव नहीं है।

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