उत्तराखंडः अगर आप कोरोना पाॅजिटिव है, तो सरकार और प्रशासन के भरोसे ना रहे, सुने पीड़ित की जुबानी
देहरादून। कोरोना के इस दौर में सरकार और प्रशासन के भरोसे ना रहे। अगर आप ऐसा कर रहे तो खुद के साथ अन्याय कर रहे हैं। और यदि जिला प्रशासन और चुने प्रतिनिधियों ने आपकी सहायता के लिए कोई हेल्पलाइन के पोस्टर जारी किया है तो यकीन मानिये ये उन्होंने आपकी सहायता के लिए नहीं बल्कि अपनी छवि बनाने के लिए जारी किये हैं। क्वारंटीन काल के दौरान रायपुर निवासी अमरेंद्र बिष्ट ने सोशल मीडिया के जरिये अपनी आपबीती कुछ इस तरह से बताई।
सोशल मीडिया के जरिये अमरेन्द्र बिष्ट बता रहे हैं कि उनका पूरा परिवार कोरोना से संक्रमित हो गया था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने उनके घर को माइक्रो कंटेटमेंट जोन घोषित कर सील कर दिया। नियमानुसार उनका क्वारटांइन काल 13 मई को पूरा होना था। लेकिन जिला प्रशासन उनके घर को सील करने के बाद उन्हें भूल गया है। उन्होंने 18 दिन बीत जाने के बाद उन्होंने आइसोलेशन से मुक्त करने के लिए एसडीएम से गुहार लगाई किन्तु एसडीएम ने अपनी लाचारी जाहिर कर दी। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी, देहरादून के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी, स्थानीय विधायक उमेश शर्मा और देहरादून के महापौर सुनील उनियाल गामा से सम्पर्क किया, लेकिन जिलाधिकारी से लेकर प्रभारी मंत्री तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली। हेल्पलाइन के नाम छपे पोस्टरों में फोन नम्बर या तो बंद थे या उन्हें उठाने वाला कोई नहीं था।
इसके बाद उन्होंने नरेन्द्र नगर विधायक और शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल से किसी तरह सम्पर्क साधा और उनको अपनी सारी व्यथा बताई। जिसके बाद सुबोध उनियाल की पहल पर उनके परिवार के आइसोलेशन पूरी होने की कार्रवाई हो सकी।
मीडिया और सोशल मीडिया में इमेज बिल्डिंग के इतर बदइंतजामी का एक मामला और सामने आया है। ये मामला टिहरी जिले के बागवान गांव का है। जहां 49 कोरोना संक्रमित मिले। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए गांव को कंटेटमेंट जोन घोषित कर दिया है। प्रशासन ने गांव में कोरोना सवंमित ग्रामीणों को कोरोना किट भी आंवटित की है। लेकिन गांव के प्रधान का आरोप है कि प्रशासन ने वहां आधी-अधूरी दवाइयंा ही बांटी है। ग्राम प्रधान का कहना है कि जिन दवा का नाम किट के बाहर लिखा है वे सभी किट में नहीं है। ग्राम प्रधान का यह भी कहना है कि जब उसने इसकी शिकायत सबंधित अधिकारियों से की तो कोरोना टेस्ट करने वाले विकासखण्ड हिंडोलाखाल की तरफ से जवाब में कहा गया कि बागवान कीर्तिनगर विकासखण्ड के अन्तर्गत है । अतः जो दवाई कम हैं ,वे अब कीर्तिनगर विकासखंड से ही मिलेंगीं जबकि कीर्तिनगर विकासखंड से जवाब मिला कि टेस्ट करनेवाले तथा कम दवा देने का कार्य विकासखंड हिंडोलाखाल ने किया है,वहीं से शेष दवाओं को दिया जायेगा।
पूरे देश के साथ प्रदेश में कोरोना के कहर से जूझ रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चैपट है। चारों तरफ बदइंजामी का माहौल है। जिम्मेदार मंत्री और जनप्रतिनिधि अपने हेल्पलाइन वाले पोस्टर छापकर उद्घाटनों में मशगूल हैं। वहीं प्रदेश की नौकरशाही ठोस प्रबंधन के बजाय अपनी मनमानी रवायत नहीं छोड़ पाई है। जिम्मेदार अफसर किस तरह प्रदेश सरकार को गुमराह कर रहे हैं मीडिया के सामने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी खुद ही बता चुके हैं।
